ट्यूनीशिया में प्रधानमंत्री मेहदी जोम्मा के नेतृत्व वाली नई टेक्नोक्रेटिक सरकार ने 29 जनवरी 2014 को शपथ ली. इस प्रकार नई टेक्नोक्रेटिक सरकार ने देश का राजनीतिक विक्षोभ मिटाने के लिए एक समझौते के अंतर्गत इस्लामिक-नीत प्रशासन का स्थान लिया. सरकार नए चुनाव करवाने की तैयारी भी करेगी.
सत्ता का पिछला हस्तांतरण देश के 193 कानून-निर्माताओं में से 149 ने अनुमोदित किया था. यह हस्तांतरण एक संसदीय सत्र के बाद राष्ट्रपति के महल में हुआ.
देश के नए मंत्रियों ने अपने पदों की शपथ ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति मोंसेफ मर्जूकी से ग्रहण की. प्रमुख इस्लामिस्ट पार्टी एन्नाहदा द्वारा 2013 में गठित सरकार की सत्ता अभ्यर्पित करने के लिए तैयार हो जाने के बाद यह संभव हो पाया. इस समझौते ने लंबे समय से विलंबित नए संविधान के अंगीकरण को भी आगे कर दिया, जिसे 27 जनवरी 2014 को अपनाया गया. अरब स्प्रिंग क्रांति के तीन वर्ष बाद अंतत: राष्ट्रीय असेंबली ने नया संविधान अंगीकृत कर लिया. संसद और राष्ट्रपति के चुनाव 2014 के अंत तक होंगे.
इसके अतिरिक्त, ट्यूनीशिया की नई सरकार के गठन का समर्थन करने वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 29 जनवरी 2014 को 500 मिलियन डॉलर की सहायता जारी की. देश की राजनीतिक अस्थिरता के कारण जून 2013 में स्वीकृत 1.76 बिलियन डॉलर के ऋण की राशि रोक ली गई थी. फंड्स में दो वर्षों में 1.76 बिलियन डॉलर और 506.7 बिलियन डॉलर का वितरण शामिल था. जारी की गई राशि 2003 में हुई ऋण की डील का दूसरा भाग था.
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