बिहार सरकार ने 3 दिसंबर 2013 को राज्य में माओवादियों के लिए नयी समर्पण और पुनर्वास नीति को मंजूरी दी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को मंजूरी दी गयी. नक्सलियों को समझाने के उद्देश्य से नई आत्मसमर्पण नीति से युवाओं को हथियार छो़ड कर एक सामान्य जीवन व्यतीत करने और समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए किया गया है. राज्य के औरंगाबाद जिले में 3 दिसंबर 2013 को नक्सलियों द्वारा एक बारूदी सुरंग विस्फोट में सात पुलिसकर्मियों के मारे जाने के बाद सरकार ने इस कदम को उठाया है.
नई समर्पण और पुनर्वास नीति
• नई नीति के अनुसार 2.5 लाख रुपये की धनराशि राज्य, क्षेत्रीय, केंद्रीय समितियों और नई नीति के तहत आत्मसमर्पण कर रहे माओवादियों के पोलितब्यूरों के सदस्यों को दी जाएगी. यह राशि बैंक में जमा की जाएगी और समर्पण के तीन साल बाद दी जाएगी.
• वजन के आधार पर हथियारों और विस्फोटकों के साथ आत्मसमर्पण कर रहे लोगों के लिए एक अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी.
• इससे पहले 2001 की नीति के तहत, 10000 रूपये समर्पण के लिए प्रति माह और 3000 रुपये की धनराशि पुनर्वास के लिए तत्काल सहायता के रूप में दी जाती थी.
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