पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) ने कर्नाटक के बेंगलुरू में बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के भीतर भारत का पहला बाड युक्त हाथी अभयारण्य बनाने की घोषणा 29 जनवरी 2015 को की.
अभयारण्य का मॉडल पेटा सलाहकार और हाथी विशेषज्ञ कैरल बकले द्वारा डिजाइन किया गया है और यह बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान का ही एक विस्तार होगा जो जैविक उद्यान के भीतर 49.5 हेक्टेयर का क्षेत्र घेरेगा.
अभयारण्य हाथियों के झुंड को आज़ादी से और बिना मानवीय हस्तक्षेप के घूमने और तालाबों में स्नान करने के लिए अनुमति प्रदान करेगा, साथ ही हाथी जंजीरों के बंधन से मुक्त होकर एक दूसरे से मेलजोल रख सकेंगे.
पेटा संरक्षित संपर्क के सिद्धांत पर देखभाल करने वाले स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करेगा. संरक्षित संपर्क हाथियों पर शारीरिक दंड की सदियों पुरानी दिनचर्या के बदले हाथियों के प्रबंधन की सकारात्मक सुदृढीकरण तकनीक प्रदान करता है.
इसके अलावा हाथियों और महावतों को सुरक्षा उपायों के लिए प्रशिक्षण सुविधा का भी प्रावधान किया गया है.
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