एड्स के घातक परिणामों से भारत का परिचय कराने वाली प्रसिद्ध एचआईवी शोधकर्ता डॉक्टर सुनीति सोलोमन का 28 जुलाई 2015 को चेन्नई में निधन हो गया. वे 76 वर्ष की थीं.
उन्होंने वर्ष 1986 में पहली बार भारत में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि की थी.
सुनीति और उनके सहयोगियों ने वर्ष 1986 में 6 लोगों के रक्त नमूनों की जांच कर के उनमें एचआईवी पॉजिटिव पाया था. उनके शोध के उपरांत ही देश में एड्स संक्रमण के शोध तथा प्रशिक्षण सम्बन्धी कार्य आरंभ किए गए.
सुनीति मद्रास मेडिकल कॉलेज एंड गवर्नमेंट जनरल हास्पिटल में मायक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर रहीं. उन्होंने पहले स्वैच्छिक जांच और काउंसलिंग केंद्र और एड्स रिसर्च ग्रुप की स्थापना भी की. वह वाई.आर. गायतोंडे सेंटर फॉर एड्स रिसर्च एंड रिसर्च की संस्थापक निदेशक थीं.
वर्ष 2009 में विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय ने सुनीति को “नेशनल वीमेन बायो साइंटिस्ट अवार्ड” से सम्मानित किया. वर्ष 2012 में डॉ. एम.जी.आर. विश्वविद्यालय ने उन्हें एचआईवी/एड्स पर काम करने के लिए लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया. उनके परिवार में बेटा डॉ. सुनील सोलोमन हैं.
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