भारत में डायरिया और निमोनिया जैसी बीमारियों से पांच वर्ष से कम आयु के करीब छह लाख बच्चों की मौत प्रत्येक वर्ष होती है. यूनिसेफ द्वारा 8 जून 2012 को जारी रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है. जारी रिपोर्ट के अनुसार उपचार के आसान तरीके अपनाकर गरीब और विकासशील देशों में डायरिया और निमोनिया से मरने वाले बीस लाख बच्चों की जान को बचाया जा सकता है.
यूनिसेफ द्वारा डायरिया और निमोनिया जैसी बीमारियों से मरने वाले बच्चों संबंधी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में 2,197,000 बच्चों की मौत हुई थी. 609,000 बच्चों की मौत के साथ भारत 75 देशों की सूची में शीर्ष पर है. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में निमोनिया और डायरिया से होने वाली मौतों में से करीब 50 प्रतिशत मौतें दुनिया के पांच गरीब और बड़ी जनसंख्या वाले देशों भारत, नाइजीरिया, कांगो, पाकिस्तान और इथोपिया में होती हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों को डायरिया और निमोनिया से बचाने का सबसे आसान और कारगर तरीका है कि उन्हें स्तनपान कराया जाए. साफ पानी और स्वच्छता की कमी भी इन बीमारियों की जड़ है.
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