दिसंबर 2013 के तीसरे सप्ताह में भारतीय वैज्ञानिकों और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) ने मधुमेह रोगियों के लिए इंसुलिन की गोली विकसित की.
काफी लंबे समय से मांग की जाने वाली इंसुलिन की गोली को वैज्ञानिकों ने विकसित कर लिया है जिससे मधुमेह के लाखों लोगों को इनसुलिन थेरेपी का विकल्प मिल गया.
चूहों पर किए गए प्रयोगों में गोली ने खून में ग्लूकोज का स्तर इंजेक्शन लगाए जाने वाले इंसुलिन जितना ही कम कर दिया और इसका प्रभाव भी इंजेक्शन वाले इंसुलिन जितना ही लंबे समय तक था.
शरीर में मौजूद पाचन एंजाइम खाद्य पदार्थों के टुकड़े करने में बहुत अच्छे हैं और वे इंसुलिन को काम करने से पहले ही तोड़ देते हैं. इसके साथ ही, इंसुलिन शरीर में आंत के माध्यम से आसानी से अवशोषित नहीं हो पाता है.
इन समस्याओँ से निपटने के लिए पंजाब में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) के शोधकर्ताओं ने इंसुलिन को पाचन एंजाइमों से गोली में बंद करने के लिए दो तरीके अपनाए और फिर उसे रक्त में डाला.
शोधकर्ताओँ की टीम में आशीष कुमार अग्रवाल, हर्षद हार्डे, कौशिक थांकी और संयोग जैन थे जिन्होंने लिपिड या लिपोजोम से बनी छोटी थैलियों में इंसुलिन को भरा. इसके बाद उन्होंने लिपोजोम को पॉलिइलेक्ट्रोलाइट्स की सुरक्षात्मक परतों में लपेटा.
अवशोषित होने और आंत की दीवारों के पार इसे पहुंचाने के लिए उन्होंने इसमें फॉलिक एसिड और विटामिन बी का एक प्रकार भी जोड़ा.
यह एक अमेरिकी केमिकल सोसायटी जर्नल बायोमैक्रोमॉलेक्यूल्स, वाशिंगटन में प्रकाशित हुआ था.
मधुमेह
मधुमेह को मधुमेह मेलिटस भी कहा जाता है. यह चयापचय रोगों के एक समूह का वर्णन करता है जिसमें व्यक्ति के खून में ग्लूकोज का स्तर बहुत ज्यादा ( बल्ड सुगर) हो जाता है. इसकी वजह या तो शरीर द्वारा इंसुलिन का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन न कर पाना होता है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पातीं या फिर दोनों ही हो सकते हैं.
मधुमेह तीन प्रकार का होता है– टाइप 1 मधुमेह, टाइप 2 मधुमेह और गर्भावधि मधुमेह.
एक अनुमान के अनुसार विश्व में करीब 347 मिलियन लोग मधुमेह के शिकार हैं. मधुमेह के रोगियों को कई बार अपने ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए और उन्हें आजीवन इंसुलिन का इंजेक्शन लेना होता है ताकि उनके हार्मोन में पर्याप्त स्तर बना रहे.
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