रीयल इस्टेट (नियमन और विकास) विधेयक, 2013 को राज्यसभा में 14 अगस्त 2013 को पेश किया गया. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी 4 जून 2013 को ही दे दी थी. आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास ने इस विधेयक को पेश किया. इस विधेयक को पेश करने के तुरंत बाद इसे समीक्षा और सुझावों के लिए शहरी विकास पर गठित संसदीय स्थायी समिति के पास भेज दिया गया.
इस विधेयक के माध्यम से एकसमान नियामक वातावरण उपलब्ध कराया गया है ताकि उपभोक्ता हितों की रक्षा हो सके, विवादों का शीघ्र निपटारा हो सके और रीयल इस्टेट क्षेत्र का क्रमबद्ध विकास सुनिश्चित हो सके.
रीयल इस्टेट (नियमन और विकास) विधेयक, 2013 का उद्देश्य
इसका उद्देश्य उपभोक्ता हितों की रक्षा करना, रीयल इस्टेट से संबंधित लेन देन में निष्पक्षता को बढ़ावा देना और परियोजनाओं का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करना है.
रीयल इस्टेट (नियमन और विकास) विधेयक, 2013 के लाभ
• इस विधेयक में अपार्टमेंट, कॉमन एरिया, कारपेट एरिया, विज्ञापन, रीयल इस्टेट प्रोजेक्ट, आदि को परिभाषित किया गया है ताकि इस क्षेत्र का स्वस्थ और क्रमबद्ध विकास सुनिश्चित हो सके.
• दूरसंचार, बिजली, बैंकिंग, प्रतिभूति, बीमा आदि जैसे अन्य क्षेत्रों की तरह एक विशेष नियमन इस विधेयक में शामिल किया जा रहा है जिसमें सुधारात्मक और रोकथाम संबंधी उपाय शामिल किए गये हैं.
•विधेयक में रीयल इस्टेट क्षेत्र के एजेंटों के पंजीकरण का प्रस्ताव किया गया है. इससे मनी लाउंडरिंग की गतिविधियों की रोकथाम हो सकेगी.
• प्रोमोटरों के लिए सभी परियोजनाओं के पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर उपभोक्ता हितों की रक्षा करने का उपाय किया गया है.
• इस विधेयक से परियोजनाओं से संबंधित लेन देन में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा.
• इस विधेयक में रीयल इस्टेट प्राधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण के द्वारा एक नियामक तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है. इससे प्रोमोटर खरीदार और रीयल इस्टेट एजेंटों के लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण हो सकेगा.
विधेयक के मसौदे की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैं:
विधेयक की उपयोगिता: प्रस्तावित विधेयक आवासीय रीयल इस्टेट के लिए लागू होगा, जैसे आवास और आवास के लिए इस्तेमाल में आने वाला कोई अन्य स्वतंत्र भू-खंड. हालांकि यह विधेयक उस भू-खंड के लिए लागू नहीं होगा, जो 1000 वर्गमीटर से अधिक हो अथवा उस पर 12 से अधिक अपार्टमेंट बनाने का प्रस्ताव हो.
महत्वकपूर्ण परिभाषाएं: इस विधेयक में अपार्टमेंट, कॉमन एरिया, कारपेट एरिया, विज्ञापन, रीयल इस्टेट प्रोजेक्ट, आदि को परिभाषित किया गया है ताकि इस क्षेत्र का स्वस्थ और क्रमबद्ध विकास सुनिश्चित हो सके.
रीयल इस्टेट नियामक प्राधिकरण की स्थापना: प्रस्तावित विधेयक में प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में एक अथवा एक से अधिक रीयल इस्टेट नियामक प्राधिकरण स्थापित करने अथवा सरकार द्वारा निर्धारित कार्यकलापों, शक्तियों और उत्तरदायित्वों के साथ दो अथवा अधिक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक प्राधिकरण स्थापित करने का विचार किया गया है. इसमें न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति का भी प्रस्ताव किया गया है, जो विभिन्न पक्षों के बीच विवादों का निपटारा कर सकें और जुर्माना तथा ब्याज का निर्धारण कर सके.
रीयल इस्टेट परियोजनाओं और रीयल इस्टेट एजेंटों का पंजीकरण: प्रस्तावित विधेयक में किसी प्रकार की अचंल संपत्ति की बिक्री के इच्छुक रीयल इस्टेट एजेंटों और रीयल इस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य बनाया गया है.
परियोजना संबंधी जानकारी का अनिवार्य जन प्रकाशन: इसके अंतर्गत सभी पंजीकृत परियोजनाओं के संबंध में सभी जानकारी, प्रोमोटर, परियोजना, ले-आऊट योजना, विकास कार्य, जमीन, कारपेट क्षेत्र, बुक किये गये अपार्टमेंट की संख्या, कानूनी मंजूरियों का विवरण, रीयल इस्टेट एजेंट, ठेकेदारों, वास्तुविद, स्ट्क्चरल इंजीनियर के नाम और पते देना सम्मिलित है.
प्रोमोटर के कार्य और जिम्मेदारी
• प्रोमोटरों को स्वीकृत योजना और परियोजना संबंधी सभी जानकारियों को देना होगा और विज्ञापन के अनुरूप सत्यता संबंधी जिम्मेदारी किसी भी प्रकार की ढांचागत कमी को दूर करने और कमी होने पर धन वापस करने संबंधी नियमों को पालन करना होगा.
• प्रवर्तकों द्वारा परियोजना की निर्माण लागत को पूरा करने के लिए प्राप्त किये गये धन में से सरकार द्वारा अधिसूचित किये गये 70 प्रतिशत या उससे कम को अनिवार्य रूप से एक अलग बैंक खाते में जमा करना.
रीयल इस्टेट एजेंट्स के कार्य: रीयल इस्टेट एजेंट्स इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी ऐसी अचल संपत्ति जो प्राधिकरण के पास पंजीकृत न हो कि बिक्री नहीं करेंगे. इसके साथ ही सभी दस्तावेजों और लेखा खातों को रखने, किसी भी प्रकार के अनुचित व्यापार में शामिल न होने, बुकिंग के समय दिये जाने वाले जरूरी दस्तावेजों की आवंटी को उपलब्ध कराने और इस संबंध में समय-समय पर बनाये गये अन्य कार्यों को पूर्ण करना.
आवंटी के अधिकार और कर्तव्य: बुक की गई संपत्ति से संबंधी जानकारी को प्राप्त करने का अधिकार, परियोजना के समयबद्ध पूरा होने में चरण अनुसार जानकारी का अधिकार प्रवर्तकों द्वारा घोषित किये गये अपार्टमेंट या प्लॉट या भवन के कब्जे संबंधी जानकारी, कब्जा मिलने के बाद आवश्यक दस्तावेजों और योजनाओं को जानने का अधिकार. समझौते के अनुसार आवंटी को आवश्यक भुगतान और अन्य जिम्मेदारियां पूर्ण करनी होगी.
रीयल इस्टेट नियामक प्राधिकरण की प्रचार भूमिका: प्राधिकरण रीयल इस्टेट विकास के लिए समन्वय संबंधी प्रयासों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा और क्षेत्र को पारदर्शी, प्रभावी और प्रतियोग्यत्मक बनाने के लिए सरकार को आवश्यक सलाह देगा.
विवादों को दूर करने के लिए त्वरित निर्णय प्रक्रिया: प्राधिकरण द्वारा विवादों के निपटारे के लिए त्वरित निर्णय प्रक्रिया की स्थापना, इसके अंतर्गत राज्य सरकार में संयुक्त सचिव स्तर से ऊपर के न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. प्राधिकरण और न्यायिक अधिकारी के निर्णयों के विरूद्ध सुनवाई के लिए न्यायधिकरण की स्थापना की जाएगी.
केन्द्रीय सलाहकार परिषद की स्थापना: इस अधिनियम से संबंधित विषयों के क्रियान्वयन पर केन्द्र सरकार को सलाह देने के लिए केन्द्रीय सलाहकार परिषद की स्थापना की जाएगी. परिषद को नीतिगत विषयों, उपभोक्ताओं हितों की रक्षा, रीयल इस्टेट क्षेत्र के विकास पर सभी प्रमुख सिफारिशों को देने के लिए चुना गया है. परिषद में अन्य लोगों के साथ राज्यों के पांच प्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे. इनका चयन बारी-बारी से किया जाएगा.
रीयल इस्टेट अपीलीय न्यायधिकरण की स्थापना: राज्य सरकारों द्वारा आदेशों, निर्णयों और प्राधिकरण तथा सक्षम न्यायिक अधिकारी के निर्देशों पर सुनवाई के लिए रीयल इस्टेट अपीलीय न्यायधिकरण की स्थापना. अपीलीय न्यायधिकरण की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के निवर्तमान या सेवानिवृत न्यायाधीश करेंगे, इसमें एक न्यायिक और एक प्रशासनिक या तकनीकी सदस्य होगा.
दंडात्मक प्रावधान: रीयल इस्टेट आवासीय परियोजना का पंजीकरण न करना- रीयल इस्टेट परियोजना की प्रस्तावित लागत का दस प्रतिशत तक जुर्माना जैसा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किया गया हो.
पंजीकरण संबंधी आदेशों के अवहेलना या लगातार नियम तोड़ना
• रीयल इस्टेट परियोजना की प्रस्तावित लागत का दस प्रतिशत तक जुर्माना या तीन वर्ष की सजा या दोनों जैसा प्राधिकरण द्वाना निर्धारित किया गया हो.
• जानकारी होने के बावजूद गलत जानकारी देना या पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय जान बुझकर उल्लंघन करना या कानून के अनुरूप अन्य उल्लंघन-रीयल इस्टेट परियोजना की प्रस्तावित लागत का पांच प्रतिशत तक जुर्माना जैसा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किया गया हो.
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