18 नवंबर 2015 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2015– 16 से 2019– 20 यानि पांच वर्षों के लिए भारतीय विकास एवं आर्थिक सहायता योजना (आईडीईएएस) के विस्तार को मंजूरी दे दी.
विस्तार को मंजूरी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सीसीईए ने योजना की निरंतरता में प्रासंगिकता को देखते हुए दी.
विस्तार अवधि के दौरान योजना के हिस्से के तौर पर करीब 3771 करोड़ रुपयों का उपयोग किया जाएगा.
वास्तव में साल 2005– 06 से इसकी शुरुआत के बाद से यह योजना में किया जाने वाला दूसरा विस्तार है. पहले पांच वर्षों के विस्तार की मंजूरी 2009– 2010 में दी गई थी.
आईडीईएएस की विशेषताएं
- भारत को उभरती हुई आर्थिक शक्ति, निवेशक देश और विकासशील देशों के लिए भागीदार देश के रूप में दिखाते हुए यह विदेशों में भारत के सामरिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का प्रयास करता है.
- कोष ऋण देने वाले बैंक को क्रेडिट रेखा पर समीकरण समर्थन (एलओसीएस) के ब्याज भुगदान के लिए है.
- विदेश मंत्रालय (एमईए) एलओसी के लिए प्रस्तावों को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग को भेज सकता है.
- वित्त मंत्री के अनुमोदन के साथ एलओसी भारत के आयात निर्यात बैंक या किसी भी अन्य इच्छुक बैंक/ ऋण दाता एजेंसी के माध्यम से संचालित किया जाएगा.
- ऋण दाता बैंक एलओसी के लिए वित्त मुहैया कराने हेतु बाजार से संसाधन की उगाही करेगा और केंद्र सरकार ब्याज समतुल्यीकरण समर्थन (आईईएस) मुहैया कराएगी और ऋण दाता बैंक की गारंटी देगी.
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