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अजातशत्रु और बिम्बिसार की कहानी

जैसे-जैसे समय बीतता गया, मगध उत्तरी भारत के सभी राज्यों के बीच शक्तिशाली राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया था.
Apr 30, 2014 12:58 IST
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जैसे-जैसे समय बीतता गया, मगध उत्तरी भारत के सभी राज्यों के बीच शक्तिशाली राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया था. राजगृह  मगध की राजधानी थी. कुछ भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मगध साम्राज्य की  महानता स्थापित हुई . तांबे और लोहे के भण्डार गया के पास पाये गये. गंगा घाटी के आस-पास  की मिटटी उपजाऊ थी. इस प्रकार मगध के लिये यह एक महत्वपूर्ण लाभ था. मगध का नाम बिम्बिसार और अजातशत्रु के समय के समाया में, अपने चरम बिंदु पर पहुंच गया था.

बिम्बिसार ( 546-494 ईसा पूर्व )

बिम्बिसार 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक 52 वर्षों तक शासन किया. वह अपने बेटे अजातशत्रु ( 492-460 ईसा पूर्व )के द्वारा कैद में डाल दिया गया था और बाद बाद में उसकी हत्या कर दी गयी थी. बिम्बिसार मगध का शासक था. वह हर्यंक राजवंश से सम्बंधित था.
वैवाहिक गठबंधन के माध्यम से उसने अपनी स्थिति और समृद्धि को मजबूत बनाया. उसका पहला गठबंधन कोशल से था, जहाँ की रानी का नाम कोसला देवी था. वह कासी क्षेत्र को दहेज के रूप में प्राप्त किया था. उसके बाद  बिम्बिसार लिच्छवि परिवार की राजकुमारी चेल्लना से विवाह किया था इस रिश्ते की वजह से उसे उत्तरी सीमा की तरफ से सुरक्षा प्राप्त हुई. एक बार फिर वह केंद्रीय पंजाब में अवस्थित मद्र शाही घराने की राजकुमारी खेमा से शादी कर ली. उसने अंग के राजा ब्रह्मदत्त को  हराया और उसके साम्राज्य पर कब्जा कर लिया. उसका अवंति के साथ बेहतर संबंध था.

अजातशत्रु ( 494-462 ईसा पूर्व )

अजातशत्रु ने अपने पिता को मारकर उसका राज्य छीन लिया. अपने शासन काल के दौरान वह विस्तार की आक्रामक नीति का पालन करता रहा. इस तरह वह काशी और कोशल की तरफ उन्मुख हुआ.इसकी वजह से  मगध और कोशल के बीच लंबे काल तक अशांति विद्यमान रही. कोशल राजा ने अजातशत्रु से अपनी पुत्री का विवाह कर दिया और उसे काशी देकर शांति स्थापित किया. अजातशत्रु ने वैशाली के लिक्ष्वियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की और वैशाली गणतंत्र पर विजय प्राप्त की. यह युद्ध सोलह वर्षों तक जारी रहा.

शुरुआत में जैन धर्म का अनुयायी था लेकिन बाद में बौद्ध धर्म को समर्थन देना शुरू किया. उसने कहा कि वह गौतम बुद्ध से मिला था. यह दृश्य भरहुत की मूर्तियों से प्रमाणित है. उसने कई चैत्यों और विहारों का निर्माण करवाया था. बुद्ध की मृत्यु के बाद प्रथम बौद्ध परिषद में वह उपस्थित थ.