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मुद्रा की परिभाषा

मुद्रा एक ऐसा मूल्यवान रिकॉर्ड है या आमतौर पर वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान के रूप में स्वीकार किया जाने वाला तथ्य है.
Nov 4, 2014 17:31 IST
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मुद्रा एक ऐसा मूल्यवान रिकॉर्ड है या आमतौर पर वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान के रूप में स्वीकार किया जाने वाला तथ्य है. यह सामाजिक-आर्थिक संदर्भ के अनुसार ऋण के पुनर्भुगतान के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

शब्द "मुद्रा" के सन्दर्भ में यह विश्वास किया जाता है कि यह हेरा के मंदिर से उत्पन्न हुआ है. जोकि रोम के सात पहाड़ियों में से एक कापितोलिने से सम्बंधित है. प्राचीन समय में हेरा का इस्तेमाल मुद्रा के रूप में किया जाता था.

मुद्रा का मुख्य कार्य हैं:

• विनिमय का माध्यम
• खाते की एक इकाई(यूनिट ऑफ़ अकाउंट)
• मूल्य की एक दुकान(स्टोर ऑफ़ वैल्यू)
• आस्थगित भुगतान का एक मानक

कोई भी चीज जो उपरोक्त मानकों को पूरा करता है उसे हम मुद्रा के रूप में मान सकते हैं.

मुद्रा ऐतिहासिक वस्तु के रूप में स्वीकार की जाती है. यह बाजार का मापक होती है. ऐतिहासिक रूप से ही इसका आस्तित्व रहा है. लेकिन व्यावहारिक रूप से सभी समकालीन मुद्रा फिएट प्रणाली पर आधारित होती है. फ़िएट मुद्रा का अर्थ है कोई चेक या उधारी की राशि जोकि आंतरिक रूप से मुल्यरहित हो और उसे भौतिक रूप से स्वीकार किया जा सकता है. यह अपने मूल्य की स्वतः ही खोज करती है. अर्थात इसके मूल्य का निर्धारण सरकारों द्वारा किया जाता है जोकि एक कानूनी विधा है. अर्थात यह वह है कि जोकि देश के परिसर के भीतर भुगतान के एक फार्म के रूप में स्वीकार किया जाता है.

एक देश की मुद्रा की आपूर्ति मुद्रा (सिक्के या पैसों) के रूप में होती है. जिसके अन्दर बैंक की मुद्राएं भी शामिल होती हैं. विकसित देशो में यह इसका रिकॉर्ड कागजी तौर ब्राड मनी के तौर पर रखा जाता है. ब्राड मनी से तात्पर्य यह है कि इसके अंतर्गत आमतौर पर वाणिज्यिक बैंकों में मांग जमाओं को शामिल किया जाता हैं. इसके अंतर्गत उस मुद्रा को भी शामिल किया जाता है जिस तक आसानी से पहुँच को बनाये रखा जा सकता हो. ब्राड मनी के अंतर्गत तरल मुद्रा  और गैर-नकद घटक को शामिल किया जाता है जोकि आम तौर पर बहुत आसानी से नकदी में परिवर्तित किया जा सकता है.