भारत का इकलौता राज्य जिसकी है तीन राजधानी? पूर्वी तट पर है स्थित
आंध्र प्रदेश भारत का एकमात्र राज्य है जिसकी 3 राजधानियां हैं: विशाखापत्तनम (कार्यकारी), अमरावती (विधायी), और कुरनूल (न्यायिक)। जानिए कि तीन राजधानियों की व्यवस्था क्यों शुरू की गई, इसका इतिहास क्या है और संतुलित विकास के लिए यह क्यों जरूरी है। तीन राजधानियों वाले इस भारतीय राज्य के बारे में और जानने के लिए आगे पढ़ते रहें।
भारत में 28 राज्य हैं और उनमें से ज्यादातर राज्यों की केवल एक ही राजधानी है। लेकिन आंध्र प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जिसकी तीन राजधानियां हैं। यह विचार इसलिए लाया गया ताकि विकास किसी एक शहर तक सीमित न रहकर पूरे राज्य में समान रूप से फैले।
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कार्यकारी राजधानी – विशाखापत्तनम
विशाखापत्तनम, जिसे वाइजाग भी कहा जाता है, बंगाल की खाड़ी पर बसा एक बड़ा तटीय शहर है। इसे कार्यकारी राजधानी के रूप में चुना गया है, जहां से सभी सरकारी कार्यालय और प्रशासन काम करेंगे। यह शहर पहले से ही एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहां एक बड़ा बंदरगाह, समुद्र तट, उद्योग और आईटी कंपनियां हैं। इसी वजह से यह राज्य के प्रशासन को चलाने के लिए एक मजबूत विकल्प है।
विधायी राजधानी – अमरावती
अमरावती कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। यह विधायी राजधानी है, जहां राज्य विधानसभा की बैठकें होती हैं। पहले अमरावती को ही आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी बनाने की योजना थी। लेकिन बाद में, सरकार ने राजधानी से जुड़े कामों को अलग-अलग शहरों में बांटने का फैसला किया। अमरावती अपने सांस्कृतिक इतिहास और प्राचीन बौद्ध अमरावती स्तूप के लिए भी प्रसिद्ध है।
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न्यायिक राजधानी – कुरनूल
कुरनूल आंध्र प्रदेश की न्यायिक राजधानी है। इसका मतलब है कि हाई कोर्ट यहीं से काम करेगा। कुरनूल का ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि 1953 में हैदराबाद के राजधानी बनने से पहले यह आंध्र राज्य की राजधानी था। कुरनूल को यह भूमिका देने से रायलसीमा क्षेत्र में अधिक विकास लाने में भी मदद मिलती है।
तीन राजधानियां क्यों?
तीन राजधानियों का विचार 2020 में “आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम” के तहत पेश किया गया था। इसका मुख्य कारण पूरे राज्य में विकास को समान रूप से बांटना था। सरकार चाहती थी कि किसी एक शहर में भीड़भाड़ होने के बजाय, विकास और अवसर पूरे राज्य में फैलें।
दक्षिण अफ्रीका से मिली प्रेरणा
तीन राजधानियों की यह व्यवस्था दक्षिण अफ्रीका से प्रेरित थी। दक्षिण अफ्रीका की भी तीन राजधानियां हैं- प्रिटोरिया (कार्यकारी), केप टाउन (विधायी), और ब्लोमफोंटेन (न्यायिक)। आंध्र प्रदेश ने भी इसी मॉडल का पालन किया, ताकि प्रशासन, कानून बनाने और न्याय के काम को अलग-अलग शहरों में संतुलित किया जा सके।
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