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संघ लोक सेवा आयोग

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 315 संघों व राज्यों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर लोक सेवकों की नियुक्ति करता है| संघ लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक निकाय है। संघ लोक सेवा आयोग में एक अध्यक्ष और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य सदस्य शामिल होते हैं। आयोग का अध्यक्ष व सदस्य छह साल की अवधि के लिए (राष्ट्रपति द्वारा चयनित) या 65 वर्ष की आयु पाने तक, जो भी पहले हो, कार्यरत रहते हैं|
Dec 18, 2015 17:25 IST
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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 315 संघों व राज्यों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर लोक सेवकों की नियुक्ति करता है| संघ लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक निकाय है। संघ लोक सेवा आयोग में एक अध्यक्ष और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य सदस्य शामिल होते हैं। आयोग का अध्यक्ष व सदस्य छह साल की अवधि के लिए (राष्ट्रपति द्वारा चयनित) या 65 वर्ष की आयु पाने तक, जो भी पहले हो, कार्यरत रहते हैं|

संघ लोक सेवा आयोग की संरचना : अनुच्छेद 316 सदस्यों के पद की नियुक्ति और कार्यकाल से संबंध रखता है संघ लोक सेवा आयोग में एक अध्यक्ष और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य सदस्य शामिल होते हैं। आयोग के नियुक्त सदस्यों में से आधे सदस्यों को भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य की सरकार के तहत कार्यालय में कम से कम दस साल के लिए कार्यरत होना चाहिए|

राष्ट्रपति आयोग के सदस्यों में से एक सदस्य को एक कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कर सकता है यदि  :

(I) आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाये: या  :

(II)  आयोग का अध्यक्ष अनुपस्थिति के कारण या किसी अन्य कारण से अपने कार्यालय के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो|

इस तरह का सदस्य एक कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है जब तक किसी व्यक्ति को कार्यालय के कर्तव्यों का पालन करने के लिए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाये या जब तक अध्यक्ष पुनः अपना कार्य आरंभ ना कर दे, जैस भी मामला हो|

कार्यकाल

आयोग का अध्यक्ष व सदस्य छह साल की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु पाने तक, जो भी पहले हो, कार्यरत रहते हैं| सदस्य राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए अवधि के बीच में इस्तीफा दे सकते हैं| उन्हें संविधान में दी गई प्रक्रिया के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा भी हटाया जा सकता है|

कर्तव्य और कार्य

संघ लोक सेवा आयोग के कर्तव्य और कार्य निम्नलिखित वर्णित हैं:

(I) यह संघ की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों की अखिल भारतीय सेवाएँ, केंद्रीय सेवाएँ, और सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं|

(II) यह किसी भी सेवा के लिए संयुक्त भर्ती तैयार करने और परिचालन योजनाओं में राज्यों को सहायता करता है जिसके लिए विशेष योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए दो या उससे अधिक राज्यों द्वारा अनुरोध किया गया हो|

(III) निम्नलिखित मामलों पर इनसे विचार-विमर्श किया जाता है:

क. सभी मामले सिविल सेवाओं तथा सिविल पदों की नियुक्ति के तरीके से संबन्धित|

ख. सिविल सेवाओं और पदों के लिए नियुक्तियों करने में और एक सेवा से दूसरे में स्थानांतरण तथा पदोन्नति और इस तरह की नियुक्तियों, स्थानान्तरण और पदोन्नति के लिए उम्मीदवारों की उपयुक्तता पर सिद्धांतों का अनुसरण करना|

ग. एक नागरिक की हैसियत से भारत सरकार के अधीन सेवारत व्यक्ति को प्रभावित करने वाले सभी अनुशासनात्मक मामले जिसमें इन मामलों से संबन्धित स्मारक या याचिकाएं शामिल हों|

घ. अपने आधिकारिक कर्तव्य के निष्पादन में या किए गए कृत्यों का उसके खिलाफ स्थापित कानूनी कार्यवाही की रक्षा करने में एक सिविल सेवक द्वारा उठाए गए खर्च का किसी भी प्रकार का दावा करना|

च. भारत सरकार के अधीन सेवारत व्यक्ति घायल होने पर पेंशन के हक़ के लिए दावा कर सकता है और किसी भी हक़ के लिए राशि से संबन्धित कोई भी प्रश्न कर सकता है|

छ. कार्मिक प्रबंधन से संबंधित कोई भी मामला राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित|

ज. कमीशन राष्ट्रपति के समक्ष आयोग द्वारा किए गए कार्य की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं

हालांकि, संसद संघ की सेवाओं से संबंधित अतिरिक्त कार्य यूपीएससी को प्रदान कर सकती है। यूपीएससी के कार्य का विस्तार निगमित निकाय की कार्मिक प्रणाली के द्वारा या कानून द्वारा गठित अन्य निगमित निकाय या इसके तहत कोई भी सार्वजनिक संस्था द्वारा किया जा सकता है|

संघ लोक सेवा आयोग के प्रदर्शन से संबन्धित वार्षिक रिपोर्ट को राष्ट्रपति के समक्ष पेश किया जाता है| इसके बाद राष्ट्रपति इस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करता है जिसमें यह बताया गया होता है कि कहाँ पर आयोग की सलाह को नहीं स्वीकार किया गया और इस गैर स्वीकृति के पीछे का कारण क्या है|

संघ लोक सेवा आयोग की भूमिका विश्लेषण

संघ लोक सेवा आयोग केंद्रीय भर्ती एजेंसी है। यह प्रतिभा प्रणाली को बनाए रखने और पदों के लिए सबसे उपयुक्त लोगों को आगे लाने के लिए उत्तरदायी है। यह परीक्षा आयोजित करता है और ग्रुप ए एव ग्रुप बी में अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं में कर्मियों की नियुक्ति के लिए सरकार को अपनी सिफ़ारिश भेजता है| यूपीएससी की भूमिका स्वभाव से सलाहकार की होती है और सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती है| हालांकि, सरकार संसद के प्रति जवाबदेह है, यदि, वह आयोग की सलाह को खारिज कर दे|

इसके अलावा, यूपीएससी का संबंध परीक्षा प्रक्रिया से है और ना की सेवाओं के वर्गीकरण, कैडर प्रबंधन, प्रशिक्षण, सेवा शर्तों आदि के साथ संबंध रखता है| इन मामलों को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा नियंत्रित किया जाता है| सरकार पदोन्नति और अनुशासनात्मक मामलों पर संघ लोक सेवा आयोग से सलाह लेती है।