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सरकारी विधेयक और गैर-सरकारी विधेयक में अंतर

संसद में पेश होने वाले विधेयक दो तरह के होते हैं- सरकारी विधेयक और गैर-सरकारी विधेयक| हालांकि दोनों समान प्रक्रिया के तहत सदन में पारित होते हैं किंतु उनमें कुछ अंतर होता है|
Dec 24, 2016 09:21 IST

भारतीय संसद के दोनों सदनों में विधायी प्रक्रिया समान है| दोनों सदनों में प्रत्येक विधेयक को पास करने की प्रक्रिया भी समान है| जब किसी विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया जाता है और उस पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर कर दिया जाता है तब वह विधेयक एक अधिनियम या कानून बनता है| सरकारी विधेयक को संसद में केवल एक मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जबकि गैर-सरकारी विधेयक को संसद के किसी भी सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है|

गैर-सरकारी विधेयक: गैर-सरकारी विधेयक एक ऐसे कानून के लिए प्रस्तावित किया जाता है जो किसी खास व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह या निगम के लिए लागू होता है| गैर-सरकारी विधेयक किसी व्यक्ति या संस्था को अन्य कानूनों से राहत दिला सकता है या विशेष लाभ एवं शक्तियां उपलब्ध करवा सकता है जो वर्तमान कानून में वर्णित नहीं है| इसके अलावा किसी व्यक्ति या संस्था को कथित तौर पर गलत तरीके से होने वाली कानूनी कारवाई से बचा सकता है| गैर-सरकारी विधेयक को सत्तारूढ़ पार्टी के मंत्री द्वारा नहीं बल्कि सदन के किसी अन्य सदस्य के द्वारा पेश किया जाता है।

सरकारी विधेयक और गैर-सरकारी विधेयक के बीच मुख्य अंतर निम्न है:

सरकारी विधेयक

गैर-सरकारी विधेयक

1. इसे संसद में मंत्री द्वारा पेश किया जाता है|

1. इसे संसद में मंत्री के अलावा किसी भी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है|

2. यह सरकार (सत्तारूढ़ दल) की नीतियों को प्रदर्शित करता है|

2. यह सार्वजनिक विषयों पर विपक्षी दलों के मंतव्य (विचार) को प्रदर्शित करता है|

3. संसद द्वारा इसके पारित होने की पूरी उम्मीद होती है|

3. इसके संसद में पारित होने की कम उम्मीद होती है|

4. संसद द्वारा सरकारी विधेयक अस्वीकृत होने पर सरकार को इस्तीफा देना पड़ सकता है|

4. इसके अस्वीकृत होने पर सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|

5. सरकारी विधेयक को संसद में पेश होने के लिए सात दिनों का नोटिस होना चाहिए|

5. गैर-सरकारी विधेयक को संसद में पेश करने के लिए एक महीने का नोटिस होना चाहिए|

6. इसे संबंधित विभाग द्वारा विधि विभाग के परामर्श से तैयार किया जाता है|

6. इसका निर्माण संबंधित सदस्य की जिम्मेदारी होती है|

मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर

संसद में प्रस्तुत विधेयकों को निम्न चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. साधारण विधेयक: वित्तीय विषयों के अलावा अन्य सभी विषयों से संबद्ध विधेयक साधारण विधेयक कहलाते हैं|

2. धन विधेयक: ये विधेयक वित्तीय विषयों, जैसे- करारोपण (taxation), लोक व्यय (public expenditure) आदि|

3. वित्त विधेयक: ये विधेयक भी वित्तीय विषयों से ही संबंधित होते हैं (परन्तु धन विधेयकों से भिन्न होते हैं|)

4. संविधान संशोधन विधेयक: ये विधेयक संविधान के उपबंधों में संशोधन से संबंधित होते हैं|

साधारण विधेयक एवं धन विधेयक में अंतर