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चमकी बुखार (Encephalitis) पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

जैसा कि हम जानते हैं कि बिहार के इलाकों में इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की वजह से 100 से ज्यादा बच्चों की जान चली गई है. इंसेफेलाइटिस आखिर क्या है, इंसेफेलाइटिस रोग के प्रेरक एजेंट, इसके लक्षण और उपचार क्या हैं? आइये इंसेफेलाइटिस रोग या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के बारे में प्रश्न और उत्तर के माध्यम से जानते हैं.
Jun 20, 2019 11:16 IST
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इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) एक दुर्लभ बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है. इसे हिंदी में चमकी बुखार के नाम से भी जाना जाता है. बिहार में इस बीमारी से पीड़ित बच्चें ज्यादातर 1-10 आयु वर्ग के बीच हैं. इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस पर सामान्य ज्ञान प्रश्न और उत्तर स्पष्टीकरण के साथ दिए गए हैं जो आपको इंसेफेलाइटिस या AES बीमारी के बारे में अधिक समझने में मदद करेंगे.

  1. जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
    A. जापानी इंसेफेलाइटिस एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है.
    B. जापानी इंसेफेलाइटिस एक मच्छर जनित फ्लेविवायरस है.
    C. 1871 में, जापानी इंसेफेलाइटिस का पहला मामला जापान में देखा गया था.
    D. जापानी इंसेफेलाइटिस डेंगू, पीला बुखार और वेस्ट नाइल वायरस के रूप में एक ही जीनस से संबंधित है.
    Ans. A
    व्याख्या: जापानी इंसेफेलाइटिस एक बैक्टीरिया जनित बीमारी नहीं है, बल्कि मच्छर जनित फ्लेविवायरस है और डेंगू, पीला बुखार और वेस्ट नाइल वायरस के समान जीनस से संबंधित है. यह मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है.
  2.  इंसेफेलाइटिस क्या है?
    A. मस्तिष्क में सूजन.
    B. इससे मस्तिष्क में जलन सी होती है.
    C. इसे चमकी बुखार के नाम से भी जाना जाता है.
    D. उपरोक्त सभी
    Ans. D
    व्याख्या: इंसेफेलाइटिस एक बीमारी है जो मस्तिष्क में सूजन का कारण बनती है. जिसके कारण मस्तिष्क में जलन सी होती है. यह एक दुर्लभ बीमारी है और इसे एक्यूट वायरल इंसेफेलाइटिस, एसेप्टिक इंसेफेलाइटिस और चमकी बुखार के रूप में भी जाना जाता है.
  3.  इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) होने का क्या कारण है?
    A. मस्तिष्क में संक्रमण के कारण सूजन.
    B. इस रोग के मुख्य प्रेरक कारक विषाणु हैं.
    C. A और B दोनों
    D. केवल बी
    Ans. C
    व्याख्या: इंसेफेलाइटिसया या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम मस्तिष्क में संक्रमण या मस्तिष्क पर असर करने वाले प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण होता है. इसके के मुख्य कारक एजेंट हर्पीज वायरस, जापानी एन्सेफलाइटिस इत्यादि जैसे वायरस हैं.
  4. इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?
    A. तेज बुखार
    B. उल्टी
    C. भ्रम
    D. उपरोक्त सभी
    Ans. D
    व्याख्या: इंसेफेलाइटिस या AES के लक्षण हैं: तेज़ बुखार, उल्टी, सिरदर्द, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, भ्रम, गर्दन और पीठ का कड़ा होना, व्यक्तित्व परिवर्तन, गंभीर मामलों में दौरे, पक्षाघात और कोमा इत्यादि.
  5. इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से ज्यादा तर कौन प्रभावित होता है?
    A. 15 साल से कम उम्र के बच्चें.
    B. भारत में गंगा का मैदानी क्षेत्र के इलाके.
    C. केवल A
    D. A और B दोनों
    Ans. D
    व्याख्या: इंसेफेलाइटिस या AES मूल रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है. इसके अलावा, जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस के पूर्वी यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी, असम और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों जैसे गंगा के मैदानी क्षेत्रों के साथ अपने स्थानिक क्षेत्र को प्रभावित करता है.
  6. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
    A. AES उन बच्चों से जुड़ा होता है जो खाली पेट लीची का फल खाते हैं.
    B. टॉक्सिन हाइपोग्लाइसीन A और MPCG कच्चे फलों में मौजूद होते हैं जो उल्टी का कारण बनते हैं.
    C. ये विष अचानक तेज बुखार और दौरे का कारण बनता है और विशेष रूप से कुपोषित बच्चों को प्रभावित करता है.
    D. उपरोक्त सभी
    Ans. D
    व्याख्या: AES भारत के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में फैलता है और खाली पेट लीची फल खाने वाले बच्चों से जुड़ा होता है. टॉक्सिंस हाइपोग्लाइसीन A और MCPG कच्चे फलों में मौजूद होते हैं जो बड़ी मात्रा में होने पर उल्टी का कारण बनते हैं. ये विषाक्त पदार्थ अचानक तेज बुखार और दौरे का कारण बनते हैं और मुख्य रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है.
  7.  विभिन्न प्रकार के इंसेफेलाइटिस हैं:
    A. प्राथमिक इंसेफेलाइटिस
    B. माध्यमिक इंसेफेलाइटिस
    C. तृतीयक इंसेफेलाइटिस
    D. केवल A और B
    Ans. D
    व्याख्या: प्राथमिक और माध्यमिक अर्थात् मुख्य रूप से दो प्रकार के इंसेफेलाइटिस होते हैं. मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के वायरल संक्रमण से प्राथमिक इंसेफेलाइटिस होता है. जबकि द्वितीयक इंसेफेलाइटिस एक वायरल संक्रमण या एक अव्यक्त वायरस के पुनर्सक्रियन की जटिलता के रूप में विकसित होता है. जब प्रतिरक्षा प्रणाली अन्य स्थितियों से दब जाती है तो वायरस प्रतिक्रियाशील हो जाते हैं.
  8. इंसेफेलाइटिस या AES रोगियों को दिए गए उपचार हैं:
    A. कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (Corticosteroids)
    B. मैकेनिकल वेंटिलेशन (Mechanical ventilation)
    C. एंटीकॉनवल्सेंट (Anticonvulsants)
    D. उपरोक्त सभी
    Ans. D
    व्याख्या: इंसेफेलाइटिस का उपचार मूल रूप से लक्षणों पर केंद्रित है. मस्तिष्क की सूजन को कम करने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड दिया जा सकता है. यदि रोगियों के लक्षण गंभीर हैं, तो उन्हें सांस लेने में मदद करने के लिए मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता हो सकती है. कभी-कभी जिन रोगियों को दौरे पड़ते हैं, उनके लिए एंटीकॉन्वल्सेंट भी दिया जाता है.
  9.  बिहार में इंसेफेलाइटिस या AES से पीड़ित बच्चों की मौत का मुख्य कारण क्या हो सकता है?
    A. कच्ची लीची या बिना पकी हुई लीची खाने से.
    B. बिना पके हुए सेब खाने से.
    C. कच्चा केला खाने से.
    D. उपरोक्त में से कोई नहीं
    Ans D
    व्याख्या: बिहार में, मुज़फ़्फ़रपुर में कुपोषित बच्चों ने कच्ची लीची खाई और इसे खाने के बाद उचित भोजन नहीं किया. जिसके कारण ब्लड शुगर लेवल गिर गया और कुछ बच्चे तुरंत कोमा में चले गए.
  10. बिहार में, AES या इंसेफेलाइटिस से पीड़ित सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हैं:
    A. गरीब बच्चें
    B. कुपोषित बच्चें
    C. आयु 5 वर्ष से कम के बच्चें
    D. केवल A और B
    Ans. D
    व्याख्या: बिहार के मुजफ्फरपुर में, इंसेफेलाइटिस या AES से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के हैं. अध्ययन के अनुसार यदि बच्चों ने उचित आहार लिया होता तो वे इस बीमारी से पीड़ित नहीं होते.अब आप इन पेशन और उत्तर के माध्यम से इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के बारे मैं जान गए होंगे.

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