मध्य प्रदेश का 64 योगिनी मंदिर, जिससे मिलती है पुराने संसद भवन की संरचना

Last Updated: Jul 2, 2026, 12:46 IST

पुराने संसद भवन में कुल 164 स्तंभ हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के मुरैना जिले का चौसठ योगिनी मंदिर में कुल 64 कक्ष हैं। ऐसे कहा जाता है कि पुराना संसद भवन इस मंदिर से प्रेरित है।

64 योगिनी मंदिर
64 योगिनी मंदिर

नई दिल्ली स्थित पुराना संसद भवन कभी लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर हुआ करता था। हालांकि, अब इसकी जगह नए संसद भवन ने ले ली है। पुराना संसद भवन आज भी अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जो कि दिखने में गोलाकार है। इस कड़ी में भारत में एक मंदिर ऐसा भी है, जो कि गोलाकार है और इसमें 64 कमरें बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि पुराने संसद भवन का निर्माण इसकी तर्ज पर किया गया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।

इकतस्सो महादेव मंदिर नाम से मशहूर

चौसठ योगिनी मंदिर को इकतस्सो महादेव मंदिर नाम से जाना जाता है, जो कि मध्य प्रदेश के मितावली में स्थित है। यह ग्वालियर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर है।

कब और किसने कराया निर्माण 

मुरैना जिले की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, मंदिर का निर्माण 1323 ईस्वी में कच्छपघात राजवंश के राजा रहे देवपाल ने कराया था। इसके मुख्य केंद्र में एक मंदिर है, जिसके चारों ओर 64 कमरें बने हुए हैं। इन सभी कमरों में शिवलिंग स्थापित हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा में इसे इकतस्सो महादेव मंदिर कहा जाता है।

संसद भवन से क्या है संबंध

भारत में आपने अधिकांश मंदिर देखेंगे, तो पाएंगे कि वे चौकोर होते हैं, लेकिन यह मंदिर गोलाकार में बना हुआ है। मंदिर का निर्माण 100 फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी पर किया गया है, जिसके लिए 100 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर को लेकर खास बात यह है कि इसकी तुलना पुराने संसद भवन से की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि पुराने संसद भवन का निर्माण इस मंदिर से प्रेरित होकर ही किया गया है, लेकिन इसे लेकर लिखित में प्रमाण नहीं मिलते हैं। मंदिर में 64 कमरें बने हुए हैं, जिनमें पहले कभी 64 योगिनियों की मूर्तियां थीं। हालांकि, अब इनमें शिवलिंग देखने को मिलते हैं। इन सभी के केंद्र में एक बड़ा मंदिर है, जिसमें एक बड़ा शिवलिंग स्थापित है।

भूकंपरोधी है मंदिर

इस मंदिर को अपने इंजीनियरिंग चमत्कार के लिए भी जाना जाता है। दरअसल, यह मंदिर भूकंप क्षेत्र के 'सिस्मिक जोन 3' में आता है। ऐसे में यहां कई बार भूकंप आए, लेकिन इसके ठोस गोलाकार डिजाइन की वजह से मंदिर को कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

मंदिर को लेकर लोगों का अनुमान 

मंदिर में पहले क्या होता था, इसे लेकर किसी के पास कोई ठोस सुबूत नहीं हैं। हालांकि, कुछ लोग इसे प्राचीन काल में तंत्र-मंत्र का केंद्र मानते थे। वहीं, ऐतिहासिक दस्तावेजों में यह ज्योतिष और गणित की शिक्षा का केंद्र भी बताया गया है। यहां 64 योगिनियों की मूर्ति शक्ति का प्रतीक थीं। हालांकि, आज इनकी मूर्तियां नहीं हैं। आज भी इस मंदिर की वास्तुकला यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती हैं और यहां हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 2, 2026, 12:46 IST

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