Monsoon 2026: भारत में मानसून के कितने प्रकार, कहां होती है सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश? पढ़ें सब कुछ विस्तार से

Last Updated: Jun 4, 2026, 13:16 IST

Monsoon in India: भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार के मानसून होते हैं जिन्हें हम आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून और उत्तर-पूर्व मानसून के नाम से जानते है। देश की अधिकांश बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। कृषि, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था पर मानसून का सीधा प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसे भारत की जीवनरेखा कहा जाता है। सबसे अधिक वर्षा की बात करें तो यह मेघालय के मौसिनराम में दर्ज की जाती है, जबकि राजस्थान के थार मरुस्थल में सबसे कम बारिश होती है।

भारतीय मानसून: भारत की जीवनरेखा, जो खेतों से लेकर अर्थव्यवस्था तक सब कुछ तय करती है.
भारतीय मानसून: भारत की जीवनरेखा, जो खेतों से लेकर अर्थव्यवस्था तक सब कुछ तय करती है.

भारत में मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की उम्मीदों, किसानों की फसलों और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक अहम मौसमीय चक्र है। हर साल जून से सितंबर के बीच आने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की कुल वार्षिक बारिश का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा देता है। यही वजह है कि इसके आगमन पर पूरे देश की नजर रहती है। यहां हम विस्तार से भारतीय मानसून के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं।

क्या है भारतीय मानसून?

मानसून दरअसल हवाओं की दिशा में होने वाला मौसमी बदलाव है। गर्मियों में भारत की जमीन तेजी से गर्म हो जाती है, जिससे कम दाब का क्षेत्र बनता है। इस खाली जगह को भरने के लिए हिंद महासागर से नमी से भरी हवाएं भारत की ओर आती हैं और व्यापक बारिश कराती हैं। इसी प्रक्रिया को भारतीय मानसून कहा जाता है।

भारत में मानसून के प्रकार 

भारत में मानसून को मुख्य रूप से हवाओं की दिशा के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है। ये दोनों मानसून देश के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा लाते हैं और कृषि, जल संसाधनों तथा अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालते हैं, जो इस प्रकार है-

  1. दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon)

  2. उत्तर-पूर्व मानसून (Northeast Monsoon)

दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon)

यह देश की मुख्य वर्षा ऋतु है, जो जून से सितंबर तक सक्रिय रहती है। इसकी शुरुआत आमतौर पर 1 जून को केरल से होती है और जुलाई के मध्य तक यह पूरे देश को कवर कर लेता है। खेती-किसानी के लिए यही मानसून सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत का मुख्य मानसून या वर्षा ऋतु भी कहा जाता है। यह देश में होने वाली कुल वर्षा का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है।

अन्य नाम

प्रमुख मानसून, वर्षा ऋतु

अवधि

जून से सितंबर

हवा की दिशा

दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर

आगमन

मई के अंत या जून की शुरुआत, सामान्यतः 1 जून को केरल

वर्षा में योगदान

भारत की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 80%

प्रमुख शाखाएं

अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा

विस्तार

जुलाई के मध्य तक पूरे भारत में, अक्टूबर से वापसी की शुरुआत

दक्षिण-पश्चिम मानसून क्यों है खास

समुद्र से आने वाली नमी से भरपूर हवाएं।

भारत की मुख्य वर्षा ऋतु का निर्माण करती हैं।

पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर-मध्य भारत में भारी बारिश लेकर आते हैं।

आमतौर पर "भारतीय मानसून" कहने पर इसी मानसून का ही उल्लेख किया जाता है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

Monsoon in India 2026: यहां आप इस साल के दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन, एक्टिव मानसून और इसके वापसी के बारें में विस्तार से नीचे दिए गए IMD के मैप में देख सकते है-

Monsoon-in-india-2026 

Source: IMD

उत्तर-पूर्व मानसून (Northeast Monsoon)

उत्तर-पूर्व मानसून को वापसी मानसून (Retreating Monsoon) या शीतकालीन मानसून भी कहा जाता है। यह दक्षिण-पश्चिम मानसून के लौटने के बाद सक्रिय होता है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय होने वाला यह मानसून मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिणी आंध्र प्रदेश में बारिश लाता है। दक्षिण भारत के कई इलाकों के लिए यही प्रमुख वर्षा का स्रोत है।

अन्य नाम

वापसी मानसून, शीतकालीन मानसून

अवधि

अक्टूबर से दिसंबर

हवा की दिशा

उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर

हवाओं का स्वरूप

ठंडी और अपेक्षाकृत शुष्क हवाएं

वर्षा में योगदान

सीमित, मुख्य रूप से दक्षिण भारत में

प्रमुख क्षेत्र

तमिलनाडु, दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश, केरल के कुछ हिस्से

कारण

उत्तरी भारत में उच्च दबाव और समुद्र के अपेक्षाकृत गर्म रहने से

प्रभाव

मानसून के बाद साफ और धूप वाला मौसम

क्यों खास है उत्तर-पूर्व मानसून 

सितंबर के बाद उत्तरी भारत तेजी से ठंडा होने लगता है।

भूमि पर उच्च दाब बनने से हवाएं समुद्र की ओर बहती हैं।

दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों के लिए यह महत्वपूर्ण वर्षा ऋतु होती है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की तुलना में काफी कम बारिश लाती है।

कैसे आगे बढ़ता है मानसून?

मानसून सबसे पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास दिखाई देता है। इसके बाद यह केरल पहुंचता है और फिर दो ब्रांचों, अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा में बंटकर देश के अलग-अलग हिस्सों की ओर बढ़ता है। जून के अंत तक यह दिल्ली और उत्तर भारत तक पहुंच जाता है, जबकि जुलाई के मध्य तक पूरे देश में फ़ैल जाते है। 

कहां होती है सबसे ज्यादा और सबसे कम वर्षा?

पश्चिमी घाट, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में मानसून से सर्वाधिक वर्षा होती है। वहीं राजस्थान के थार मरुस्थल और दक्कन के कुछ आंतरिक हिस्सों में अपेक्षाकृत कम वर्षा होती है। 

दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व मानसून में अंतर

भारतीय मानसून की दोनों शाखाएं कैसे एक दूसरे से अलग है चलिए नीचे दी गयी टेबल की मदद से समझते है- 

विशेषता

दक्षिण-पश्चिम मानसून

उत्तर-पूर्व मानसून

मौसम

ग्रीष्म ऋतु (जून-सितंबर)

शीत/उत्तर-मानसून काल (अक्टूबर-दिसंबर)

हवा की दिशा

दक्षिण-पश्चिम से  उत्तर-पूर्व

उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम

वर्षा की मात्रा

बहुत अधिक

कम से मध्यम

प्रभावित क्षेत्र

लगभग पूरा भारत

तमिलनाडु और दक्षिणी प्रायद्वीप

हवाओं का स्वरूप

गर्म और नमी से भरपूर

ठंडी और अपेक्षाकृत शुष्क

कृषि में भूमिका

खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण

दक्षिण भारत में रबी और अन्य फसलों के लिए उपयोगी

मानसून क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। अच्छी बारिश होने पर फसल उत्पादन बढ़ता है, जलाशय भरते हैं, भूजल स्तर सुधरता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। दूसरी ओर, कमजोर मानसून से खेती प्रभावित होती है, जिससे खाद्य उत्पादन और महंगाई पर असर पड़ सकता है।

भारत में मानसून को प्रभावित करने वाले कारक

भारत में मानसून को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में ITCZ (अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र), तिब्बती पठार, जेट स्ट्रीम्स और सोमाली जेट शामिल हैं। ITCZ मानसूनी हवाओं को आकर्षित करता है, तिब्बती पठार निम्न दाब क्षेत्र उत्पन्न करता है, जेट स्ट्रीम्स मानसून की गति को नियंत्रित करती हैं, जबकि सोमाली जेट हिंद महासागर से नमी लेकर भारत की ओर पहुंचाती है।

मानसून से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण शब्द

मानसून का आगमन (Onset): जब मानसून पहली बार केरल पहुंचता है।

एक्टिव मानसून (Active Monsoon): जब सामान्य से अधिक बारिश होती है।

ब्रेक मानसून (Break Monsoon): जब कुछ समय के लिए बारिश में अचानक कमी आ जाती है।

मानसून की वापसी (Withdrawal): अक्टूबर के आसपास मानसून का धीरे-धीरे देश से लौटना।

भारतीय मानसून को देश की जीवनरेखा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह सिर्फ बारिश नहीं बल्कि, खेतों में हरियाली, जल स्रोतों में भराव और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा भी प्रदान करता है। यही वजह है कि हर साल मानसून की चाल पर किसानों से लेकर नीति निर्माताओं तक, सभी की नजर बनी रहती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कैसे है महत्वपूर्ण 

प्रतियोगी परीक्षाओं में भारतीय मानसून से जुड़े प्रश्न अक्सर भूगोल, पर्यावरण, कृषि, अर्थव्यवस्था और समसामयिक घटनाओं के संदर्भ में पूछे जाते हैं। UPSC, SSC, State PCS, रेलवे, NDA, CDS, CTET तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में निम्न प्रकार के प्रश्न देखने को मिल सकते हैं। 

मानसून से पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले किस राज्य में प्रवेश करता है?

उत्तर: केरल

प्रश्न: दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में सामान्यतः कब पहुंचता है?

उत्तर: 1 जून (प्रतिवर्ष)

प्रश्न: मानसून की वापसी सबसे पहले किस क्षेत्र से शुरू होती है?

उत्तर: पश्चिमी राजस्थान 

प्रश्न: दक्षिण-पश्चिम मानसून की कितनी शाखाएं होती हैं?

उत्तर: दो 

अरब सागर ब्रांच 

बंगाल की खाड़ी ब्रांच

प्रश्न: भारत का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र कौन-सा है?

उत्तर: मौसिनराम (मेघालय)

प्रश्न: उत्तर-पूर्व मानसून को और किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: वापसी मानसून (Retreating Monsoon)

प्रश्न: भारत में मानसून का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: स्थल और जल के असमान तापमान के कारण बनने वाले वायुदाब के अंतर को कहा जाता है।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Jun 4, 2026, 12:42 IST

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