एशिया की तीन सबसे बड़ी नदियां कौन-सी हैं, जानें यहां
एशिया को कई नदियों का घर कहा जाता है। यहां ऐसी बड़ी नदियां हैं, जो कि लंबाई के लिए जानी जाती हैं। ये नदियां न सिर्फ पीने के पानी के लिए उपयोगी हैं, बल्कि पारिस्थितिकी और जैव-विविधता के रूप से भी इनका उतना ही महत्त्व है।
एशिया का नक्शा उठाकर देखें, तो हमें यहां कई प्रमुख नदियों का घर देखने को मिलता है। यहां मौजूद पर्वत श्रेणियों से कई बड़ी नदियां निकलती हैं, जो कि न सिर्फ पीने के पानी के लिए उपयोगी है, बल्कि कृषि और पारिस्थितिकी रूप से भी इनका अधिक महत्त्व है।
इस कड़ी में एशिया की तीन सबसे लंबी नदियों की बात करें, तो यह पहले स्थान पर यांग्त्जी नदी है, जबकि दूसरे स्थान पर पीली नदी और तीसरे स्थान पर मेकांग नदी का नाम आता है। इस लेख में हम इन नदियों से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्यों को जानेंगे।
यांग्त्जी नदी
यांग्त्जी नदी एशिया की सबसे लंबी नदी होने के साथ दुनिया में तीसरे पायदान पर है। पहले स्थान पर नील और दूसरे स्थान पर अमेजन का नाम आता है। यांग्त्जी नदी की कुल लंबाई 6300 किलोमीटर है। इस नदी का उद्गम तिब्ब्त के पठार से होता है। यह नदी चीन के भीतर बहती है और आखिर में पूर्वी चीन सागर में मिल जाती है। आपको बता दें कि दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध यानि कि थ्री गोर्जेस डैम यांग्त्जी नदी पर ही बना हुआ है।
पीली नदी
पीली नदी एशिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। इस नदी पर चीनी सभ्यता का विकास हुआ था। ऐसे में इस नदी को चीनी सभ्यता का पालना कहा जाता है। नदी की कुल लंबाई 5,464 किलोमीटर है। इसके उद्गम की बात करें, तो यह पश्चिमी चीन के किंघई प्रांत से निकली है।
पीली नदी के पानी में लोयस नाम की पीली मिट्टी होती है, जिस वजह से इस नदी का नाम पीली मिट्टी ही पड़ गया है। आपको बता दें कि एक समय में पीली नदी को चीन का शोक भी कहा जाता था, क्योंकि नदी में आने वाली बाढ़ से भारी तबाही होती थी। हालांकि, मौजूदा समय में नदी पर कई बांध बन गए हैं।
मेकांग नदी
मेकांग नदी को दक्षिण-पूर्व एशिया की जीवन रेखा भी कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई 4,909 किलोमीटर है, जो कि 6 देशों से होकर गुजरती है। नदी का उद्गम तिब्बत के पठार से होता है, जो कि चीन, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम से गुजरती है।
कंबोडिया और वियतनाम में होने वाली चावल की खेती पूरी तरह से इस नदी पर ही निर्भर होती है। क्योंकि, चावली की खेती में अधिक पानी की जरूरत होती है। ऐसे में इस नदी का पानी उपयोग किया जाता है।
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