भारत के किस गांव से हुई थी ग्राम पंचायत व्यवस्था की शुरुआत, जानें यहां
भारत में आपने पंचायती राज व्यवस्था के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत के किस जिले और गांव से पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत में आपने आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप भारत के उस जिले और गांव के बारे में जानते हैं, जहां से पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। क्या थी पंचायती राज व्यवस्था और किस जिले और गांव से हुई थी शुरुआत, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
कब और कहां से शुरू हुई पंचायती राज व्यवस्था
पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत 2 अक्टूबर, 1959 में की गई थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले के बगडारी गांव से पंचायती राज व्यवस्था को शुरू किया था।
क्या है पंचायती राज व्यवस्था का इतिहास
पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत 1957 की बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशों पर किया गया था। इस व्यवस्था में त्रि-स्तरीय पंचायती व्यवस्था का सुझाव दिया गया था, जिसके तहत ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर की व्यवस्थाएं शामिल थीं। ऐसे में राजस्थान पहला राज्य था, जहां पहली बार पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया था।
73वां संशोधन है महत्त्वपूर्ण
जब आप पंचायती राज व्यवस्था के बारे में पढ़ेंगे, तो आपको 73वां संविधान संशोधन के महत्त्व के बारे में पढ़ने को मिलेगा। यह वह संशोधन था, जिसने पंचायतों को वास्तविक मजबूती दिलाई थी। 24 अप्रैल, 1993 को 73वां संविधान संशोधन लागू किया गया था। ऐसे में हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायत दिवस मनाया जाता है।
संशोधन में क्या हुए बदलाव
-पहले पंचायती व्यवस्था में कई राज्यों में 10-10 साल में चुनाव हुआ करते थे। इससे पंचायती व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही थी। वहीं, पंचायतों को आर्थिक मदद के लिए राज्यों के भरोसे बैठे रहना पड़ता था।
-सरपंचों के पास प्रशासनिक शक्तियां भी बहुत कम थी। ऐसे में इन सभी खामियों को देखते हुए 1992 में सुधार किए गए और 1993 में इसे लागू किया गया। इस संशोधन के बाद हर पांच साल में चुनाव कराना अनिवार्य हो गया था।
-पंचायत में महिलाओं की भागीदारी 33 फीसदी कर दी गई थी। पंचायतों को होने वाली आर्थिक परेशानी को देखते हुए एक आयोग का भी गठन किया गया था, जो कि पंचायतों के वित्त से जुड़ा हुआ था।
पंचायती व्यवस्था से कैसे बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
भारत के प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के पीछे पंचायती राज व्यवस्था को आधार माना जाता है। क्योंकि, इसके माध्यम से महिलाओं के हाथ में प्रशासनिक स्तर की जिम्मेदारियां पहुंची थीं, जिसमें महिलाओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सफाई पर अधिकार जोर दिया था।
इससे भारत के प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं का एक बड़ा वर्ग तैयार हुआ था, जिससे राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी थी और वे ग्रामीण राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंची थीं।
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