ध्रुव तारा हमेशा एक ही जगह क्यों दिखाई देता है, जानें कारण
आप सभी ने रात के समय आसमान में एक सबसे तेज चमकते हुए तारे को देखा होगा। इस तारे को हम ध्रुव तारे के नाम से जानते हैं। हालांकि, सबसे तेज चमकने वाला तारा सीरियस है। ध्रुव तारा अपनी स्थिरता के कारण जाना जाता है। क्या है इसके पीछे की वजह, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
हम सभी को आसमान में एक तेज चमकने वाला तारा दिखाई देता है, जिसे हम ध्रुव तारा(Polaris) के नाम से जानते हैं। यह बहुत ही आम धारण है कि ध्रुव तारा सबसे तेज चमकने वाला तारा है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है।
क्योंकि,ध्रुव तारा अपनी चमक से ज्यादा अपनी स्थिरता के लिए जाना जाता है, जो कि हमेशा उत्तरी ध्रुव में स्थित होता है। पहले जब कंपास नहीं हुआ करता था, तो ध्रुव तारे की मदद से ही नाविक उत्तर दिशा का पता लगाते थे।
48वां सबसे चमकदार तारा
आपको बता दें कि आकाश में बहुत-से ऐसे तारे हैं, जो कि बहुत तेज चमकते हैं। हालांकि, इनमें से ध्रुव तारा 48वां सबसे तेज चमकदार तारा है। वहीं, सबसे तेज चमकदार तारे की बात करें, तो यह ‘सीरियस’ है।
ध्रुव तारा सबसे अधिक स्थिर क्यों है?
अब हम ध्रुव तारे की स्थिरता के बारे में जानेंगे कि आखिर यह हमेशा एक ही जगह पर स्थित क्यों रहता है। दरअसल, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है और ध्रुव तारा पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव की सीध में है। यही वजह है कि रात के समय हमें आसमान में बाकी तारे घूमते हुए दिखते हैं, जबकि ध्रुव तारा एक ही जगह रहता है।
सूर्य से 2500 गुना अधिक चमकदार है ध्रुव तारा
ध्रुव तारा वास्तव में सूर्य से 2500 गुना अधिक चमकदार है। लेकिन, पृथ्वी से 434 प्रकाश वर्ष दूर होने के कारण यह हमें सूर्य से कम चमकदार दिखता है।
तीन तारों का समूह है ध्रुव तारा
आसमान में हमें जो ध्रुव तारा दिखता है, वह केवल एक तारा नहीं है, बल्कि तीन तारों का समूह है। यह एक प्रकार का सुपरजायंट तारा है, जो कि आकार में बहुत बड़ा है और रोशनी में सूर्य से भी बहुत तेज है। तीन तारें एक साथ होने की वजह से इनकी रोशनी और बढ़ जाती है, लेकिन दूरी की वजह से हमें यह एक ही तारा दिखाई देता है।
दिशा सूचक के रूप में होती है पहचान
पुराने समय में जब यंत्र नहीं थे, तो नाविक व यात्री ध्रुव तारे की मदद से उत्तर दिशा का पता लगाते थे। क्योंकि, यह तारा कभी अपनी जगह नहीं बदलता है, ऐसे में दिशा का पता लगाने के लिए यह सबसे सरल माध्यम होता था।
कैसे करें ध्रुव तारे की पहचान
सबसे पहले आसमान में सप्तऋषि मंडल के सात तारों को खोज लें। इसके आगे के दो तारों को मिलाने वाली रेखा सीधे ध्रुव तारे की तरफ इशारा करती है, जिससे ध्रुव तारा की स्थिति को बताया जा सकता है।
Quick Fact: खगोलविज्ञानियों की मानना है कि धरती अपनी धुरी पर हल्की-सी डगमगाती है। ऐसे में आने वाले हजारों साल बाद ध्रुव तारे की जगह कोई और तारा भी हो सकता है।
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