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क्या SBI के विलय के कारण नौकरियों में कटौती होगी?

सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) के साथ विलय के बाद SBI नौकरियों में कटौती कर सकता है। हालांकि एसबीआई की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य के अनुसार, SBI विलय प्रक्रिया से किसी तरह की नौकरी अथवा वेतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

May 22, 2017 12:34 IST
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SBI Merger: Impact on job Losses

 जैसा कि आप सभी जानते हैं कि देश के सबसे बड़े बैंक SBI जल्द ही अपने पांच सहयोगी बैंकों का विलय करने वाला है। इसके लिए बैंक ने पिछले साल विलय का प्रस्ताव पारित किया था जिसे वित्त मंत्रालय ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह एक संयुक्त इकाई बनाने जा रहा है जिसमें एक बैलेंस शीट का आकार लगभग 37 लाख करोड़ रुपये होने वाला है और विलय के बाद इसके पास करीब 3.25 लाख कर्मचारी होंगे। इसके बाद भारत और विदेशों में इस बैंक की शाखाओं की संख्या करीब 19000 हो जाएगी। विलय की खबर के बाद कई कर्मचारियों के मन में यह शंका पैदा हो गयी है कि बैंक द्वारा अपने खर्चों में कटौती के बाद कहीं उन्हें अपनी नौकरी ना खोनी पड़े। हालांकि, SBI और वित्त मंत्रालय दोनों ने बार-बार इस बात को दोहराया है कि बैंकिंग क्षेत्र में विलय के कारण किसी की नौकरी पर कोई संकट पैदा नहीं होगा।

 SBI विलय : असल तस्वीर (रियल पिक्चर)

 SBI सभी सहयोगी बैंकों के साथ ही भारतीय महिला बैंक का भी विलय करने जा रहा है। यह संयुक्त इकाई के लिए 37 लाख करोड़ रूपए की एक बैलेंस शीट का निर्माण करेगा और   विलय के बाद रियल एस्टेट की कीमत 3500 करोड़ से लेकर 4500 करोड़ हो जाएगी। कई लोगों को विलय के बारे में यह आशंका है कि इससे नौकरी पर भी खतरनाक परिणाम पड़ सकते हैं।  हालांकि, परिदृश्य पूरी तरह से अलग है :

  • सेवानिवृत्ति से कई कुशल कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा: पूरी तरह से नहीं, लेकिन अगर आप इन सभी बैंकों में सेवानिवृत्ति की तस्वीर देखते हैं, तो आप पाएंगे कि प्रत्येक वर्ष इन बैंकों से 15,000 से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं और प्रबंधन को इन पदों को भरने की जरूरत है।
  • बाजार से भर्ती कम हो जाएगी: यह हकीकत में तब्दील होने जा रहा है क्योंकि संयुक्त इकाई में कर्मचारियों की कमी नहीं होगी और इससे बाजार में भविष्य में होने वाली भर्ती प्रभावित हो सकती है। यह संभावना है कि आने वाले कुछ वर्षों में पीओ स्तर पर होने वाली भर्ती में कमी आ सकती है।
  • शाखाओं का सुव्यवस्थीकरण: विलय के बाद कई क्षेत्रों में शाखाएं बंद कर दी जाएंगी, क्योंकि आपने SBI और इससे संबंधित किसी भी संबधित बैंक की कई शाखाओं को एक जगह पर देखा होगा। विलय के बाद इन शाखाओं को बंद करना होगा जिससे कर्मचारियों की कम आवश्यकता होना स्वाभाविक है।
  • ग्राहक आधार बढ़ेगा और अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी: भारत में सबसे बड़ी संयुक्त संस्था के साथ ग्राहकों का आधार भी बढ़ेगा और इसके लिए उन्हें बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।
  • एसबीआई ब्रांड ज्यादा ग्राहकों के साथ - साथ अधिक ऋण वृद्धि को भी आकर्षित करेगा : सबसे बड़ी संयुक्त इकाई होने के कारण यह ग्राहकों को और अधिक बेहतर सेवा प्रदान करने में सक्षम होगा । इसे केवल मौजूदा तकनीक का उपयोग करके किया जा सकता है।
  • मानव संसाधन स्तर पर चुनौतियों का सामना करना होगा : इस विलय के कारण एचआर स्तर (मानव संसाधन) पर बड़ी चुनौतियां सामने होंगी। एचआर को लोगों को समायोजित करने के लिए नए पदों का निर्माण करने की आवश्यकता होगी। अधिक कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए उन्हें व्यापक वीआरएस पैकेज के साथ सामने आना पड़ेगा। एचआर को बंद हुई शाखाओं को कर्मचारियों को अन्य क्षेत्रों में फिर से पोस्टिंग करने की रणनीति तैयार करने की जरूरत होगी। हर किसी को खुश कर पाना संभव नहीं है, लेकिन हर किसी को सही मौका मिलना चाहिए ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।

SBI विलय से बैंकिंग सेक्टर में होने वाली भर्तियों में कुछ समय तक कमी आ सकती है। विलय के बाद चीजों को हल करने के लिए कम से कम 1-2 साल का समय लगेगा ताकि प्रबंधन नई इकाई में कर्मचारी युक्तिसंगतता के बारे में ठोस निर्णय ले सके।

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