केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 8 जून 2017 को ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवादों को कम करने, करदाताओं को निश्चितता उपलब्ध कराने तथा सेफ हार्बर मार्जिन को औद्योगिक मानकों के अनुरूप करने और सेफ हार्बर ट्रांजैक्शन के दायरे को बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई सेफ हार्बर व्यवस्था अधिसूचित की है जिसे इस मसले पर गठित समिति की रिपोर्ट पर आधारित है.
इससे संबंधित मुख्य तथ्य:
• कर निर्धारण वर्ष 2017-18 तक मौजूदा हार्बर व्यवस्था के तहत योग्य माने जाने वाले करदाताओं को सर्वाधिक फायदेमंद विकल्प चुनने का भी अधिकार होगा.
• यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2017 यानी कर निर्धारण वर्ष 2017-18 से प्रभावी हो चुकी है, जो अगले दो वर्षों तक यानी कर निर्धारण वर्ष 2019-2020 तक प्रभावी रहेगी.
• सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवाओं, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ी पूर्णत: या आंशिक अनुबंधित अनुसंधान एवं विकास सेवाओं और जेनेरिक औषधीय दवाओं से जुड़ी पूर्णत: या आंशिक अनुबंधित अनुसंधान एवं विकास सेवाओं के मामलों में नई सेफ हार्बर व्यवस्था 200 करोड़ रुपये तक के ट्रांजैक्शन के लिए उपलब्ध है.
• ट्रांजैक्शन की एक नई श्रेणी ‘रिसीट ऑफ लो वैल्यू-एडिंग इंट्रा ग्रुप सर्विसेज’ की शुरुआत की गयी है.
• सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं से जुड़े ट्रांजैक्शन के संदर्भ में सेफ हार्बर मार्जिन दर पिछली व्यवस्था के 22 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी के अधिकतम स्तर पर ला दी गई है.
• सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ी पूर्णत: या आंशिक अनुबंधित अनुसंधान एवं विकास सेवाओं और जेनेरिक औषधीय दवाओं से जुड़ी पूर्णत: या आंशिक अनुबंधित अनुसंधान एवं विकास सेवाओं से जुड़े ट्रांजैक्शन के संदर्भ में सेफ हार्बर मार्जिन को पिछली व्यवस्था के क्रमश: 30 और 29 फीसदी से घटाकर 24 फीसदी कर दिया गया है.
• नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवाओं से जुड़े ट्रांजैक्शन के संदर्भ में 24%, 21%, और 18% की तीन विभिन्न दरों का एक श्रेणीबद्ध ढांचा बनाया गया है जिसे पिछली व्यवस्था के 25% की एकल दर की जगह लागू किया गया है. ये नई दरें कर्मचारी लागत और संचालन लागत के अनुपात पर आधारित हैं.
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