केंद्र सरकार ने स्वर्ण बांड योजना में निवेश की सीमा बढ़ाकर चार किलोग्राम प्रति वित्तवर्ष प्रति व्यक्ति को स्वीकृति प्रदान कर दी है. अभी यह सीमा 500 ग्राम थी. इसके अलावा योजना को खरीदारों के दृष्टिगत अधिक आकर्षक बनाने हेतु अन्य नियमों को भी उदार किया गया है. जिससे योजना को अधिक खरीदारों मिल सके.
वित्त मंत्री का मानना है कि इस तरह के लचीलेपन से निवेश के नए उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा के तत्वों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा.
यह निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया. केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार यह सीमा वित्त वर्ष के आधार पर निर्धारित होगी. इसमें बाजार में सूचीबद्ध ऐसे बांडों की खरीद को भी शामिल किया जाएगा.
परिवर्तित नियम-
- योजना को अधिक आकर्षक बनाने के लिए कुछ विशेष बदलाव किए गए हैं जिससे इसे और अधिक प्रोत्साहित किया जा सके.
- हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के लिए भी यह सीमा 4 किलोग्राम होगी.
- ट्रस्टों और सरकार द्वारा समय समय पर अधिसूचित इसी तरह की इकाइयों के लिए यह सीमा 20 किलोग्राम की होगी.
- निवेश की इस सीमा में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखे बांड शामिल नहीं होंगे.
- केन्द्रीय वित्त मंत्रालय नेशनल स्टाक एक्सचेंज, बंबई शेयर बाजार और डाक विभाग के साथ विचार विमर्श करके इस सुविधा के तौर तरीके को अंतिम रूप प्रदान करेगा.
- एसजीबी की तरलता और व्यापारोन्मुखता में सुधार के लिए उचित बाजार पहल बनाई जाएंगी. एसजीबी‘एक टैप यानी मांग पर उपलब्ध कराया जाएगा.
उद्देश्य-
- बदलाव किए जाने का उद्देश्य योजना के माध्यम से लक्ष्य के अनुसार वित्त जुटाया जान और सोने के आयात की वजह से बने आर्थिक दबाव को कम करना है.
- बदलाव से चालू खाते के घाटे (कैड) में कमी की जा सकेगी.
- इसमें वित्त मंत्रालय को एसजीबी के अलग अलग संस्करण तय करके पेश करने का अधिकार दिया गया है.
- इनमें अलग अलग वर्ग के निवेशकों के लिए अलग अलग ब्याज दरें और जोखिम संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं.
योजना के बारे में -
- सरकार ने एसजीबी योजना 5 नवंबर, 2015 को अधिसूचित की थी. इसके लिए पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी ली गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य हाजिर सोने के विकल्प के रूप में वित्तीय परिसंपत्ति का विकास करना है.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation