सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी.एन.भगवती का 15 जून 2017 को निधन हो गया. वे 95 वर्ष के थे. पी.एन. भगवती देश के 17वें मुख्य न्यायाधीश थे. न्यायिक क्षेत्र में पी.एन. भगवती ने पीआईएल यानी जनहित याचिका को लागू कर काफी ख्याति पाई थी.
जस्टिस भगवती ने वर्ष 1986 में ही व्यवस्था दी थी कि मौलिक अधिकारों के मामले में कोई भी व्यक्ति सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है. उन्होंने वर्ष 1978 का मेनका गांधी पासपोर्ट कुर्की मामले में जीने के अधिकार की व्याख्या की थी.
जस्टिस भगवती ने व्यवस्था दी की व्यक्ति का आवगमन नहीं रोका जा सकता. पासपोर्ट रखने का अधिकार हर किसी को है. कैदियों को मौलिक अधिकार दिए जाने की वकाल भी जस्टिस भगवती ने की थी.
पी.एन. भगवती के बारे में:
• पी.एन. भगवती का जन्म 21 दिसम्बर 1921 को गुजरात में हुआ था.
• उन्होंने 12 जुलाई 1985 से लेकर दिसंबर 1986 तक सर्वोच्च न्यायालय में बतौर मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अपनी सेवा दी थी.
• उन्हें वर्ष 2007 में भारत सरकार की ओर से पद्म विभूषण अवॉर्ड से नवाजा गया था.
• वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन के दौरान आपातकाल में ‘भगवती बंदी प्रत्यक्षीकरण’ केस से जुड़े पीठ का हिस्सा भी रहे थे.
• उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने देश की विभिन्न जेलों से 40,000 विचाराधीन कैदियों को रिहा करने का फैसला सुनाया था.
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