केंद्र सरकार ने 04 जुलाई 2018 को उच्च शिक्षा में बजटीय आवंटन के अतिरिक्त ढांचागत विकास की जरूरत पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी (एचईएफए) की आधारभूत पूंजी का विस्तार कर इसे दस हजार करोड रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है.
केंद्र सरकार के प्रस्ताव के अनुसार उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी को इसलिए अधिक वित्तीय विस्तार प्रदान किया गया है ताकि वह शैक्षणिक संस्थानों में आधारभूत ढांचे में सुधार कर सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी.
घोषणा के मुख्य बिंदु
• शिक्षा क्षेत्र में 2022 तक इसे अपने संसाधनों के बल पर आधार पूंजी एक लाख करोड़ रुपए करने को कहा गया है.
• इसके माध्यहम से शैक्षणिक संस्थातनों की आवश्यमकताओं को समावेशी तरीके से पूरा किया जाएगा.
• इससे सभी संस्थानों खासकर केंद्रीय विद्यालयों तथा एम्स जैसे सीमित संसाधनों वाले संस्थानों को बुनियादी सुविधा जुटाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी.
• मंत्रिमंडल ने एचईएफए को शिक्षण संस्थानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधन कहां से जुटाने हैं इसके लिए कुछ दिशा निर्देश दिए हैं.
• वाणिज्यिक रूप से धन संग्रह करने की प्रक्रिया के संबंध में आर्थिक मामलों के विभाग के साथ परामर्श किया जाएगा ताकि धनराशि संग्रह कम से कम लागत पर हो सके.
कौन से संस्थान योजना के पात्र हैं?
10 साल से अधिक पुराने तकनीकी संस्थान: संपूर्ण मूलधन का पुनर्भुगतान आंतरिक रूप से संग्रह किए गये बजट संसाधनों के द्वारा करने वाले संस्थान इस योजना के पात्र होंगे.
2008 और 2014 के बीच शुरू किए गये तकनीकी संस्थान: मूलधन की 25 प्रतिशत राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त कर सकते हैं.
2014 के पहले शुरू किए गये केन्द्रीय विश्ववि़द्यालय: मूलधन की 10 प्रतिशत राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त होगा.
नये स्थापित संस्थान (2014 के बाद प्रारंभ): स्थायी कैम्पस के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा.
अन्य शैक्षणिक संस्थान तथा स्वास्थ्य मंत्रालय के वित्तीय सहायता प्राप्त संस्थान: सभी नये स्थापित एम्स और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों, केन्द्रीय वि़द्यालय/नवोदय विद्यालयों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाएगी और संबंधित विभाग/मंत्रालय संस्थान को पर्याप्त अनुदान के माध्यम से मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए प्रतिबद्ध होंगे.
उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी (एचईएफए)
सरकार ने उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी (एचईएफए) का गठन गैर लाभकारी तथा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के तौर पर 31 मई 2017 को किया था और इसे उच्च शिक्षा के लिए ढांचागत विकास की जरूरत को पूरा करने के लिए बजट में आवंटित राशि के अलावा वित्तीय साधन जुटाने का अधिकार दिया गया था.
वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पूरे मूलधन का पुनर्भुगतान संस्थान के द्वारा 10 वर्षों की अवधि में किया जाता है. ब्याज के हिस्से का भुगतान सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये अतिरिक्त अनुदान के माध्यम से किया जाएगा. अब तक एचईएफए ने 2016 करोड़ रुपये मूल्य के वित्ते प्रस्तावों को मंजूरी दी है.
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