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बढ़ते तापमान की वजह से ग्रेट बैरियर रीफ को सबसे ज्यादा नुकसान

ग्रेट बैरियर रीफ के सभी तीनों  क्षेत्र - मध्य, उत्तरी और अब दक्षिणी क्षेत्र के भी काफी बड़े हिस्से बढ़ते तापमान के कारण अत्यधिक प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) से प्रभावित हो रहे हैं.

Apr 8, 2020 14:25 IST
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ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ़ में समुद्र के लगातार बढ़ते हुए तापमान के कारण काफी हानिकारक  कोरल ब्लीचिंग हो रही है. गत 07 अप्रैल 2020 को वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के सबसे विशाल जीवित प्राणी को होने वाले खतरे के बारे में बताया.

जेम्स कुक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टेरी ह्यूजेस ने उस व्यापक सर्वेक्षण के बारे में जानकारी दी है जिसमें यह  बताया गया है कि बढ़ते तापमान के कारण केवल पिछले 5 वर्षों में 2300 किमी रीफ़ सिस्टम में तीसरी विशाल ब्लीचिंग हुई है. पहली बार इस रीफ़ ब्लीचिंग के बारे में वर्ष 1998 में पता चला था. रिकॉर्ड के मुताबिक यह सबसे गर्म वर्ष था. तापमान में निरंतर वृद्धि के कारण कोरल ब्लीचिंग में लगातार वृद्धि हुई जिस वजह से कोरल को ठीक होने में कम समय मिला.

कोरल ब्लीचिंग के कारण:

कोरल ब्लीचिंग तब होती है जब समुद्र के तापमान में बदलाव के कारण स्वस्थ कोरल तनावग्रस्त हो जाते हैं. इस कारण कोरल अपने एल्गी (शैवाल) निष्कासित करते हैं और यही एल्गी उनके टिश्यूज़ (ऊतकों) में रहते हैं और इन एल्गीज़ के न रहने पर कोरल्स का चमकदार रंग रंगहीन हो जाता है.

ग्रेट बैरियर रीफ़ कोरल ब्लीचिंग: मुख्य विशेषताएं 

• ग्रेट बैरियर रीफ़ के सभी तीनों क्षेत्र - मध्य, उत्तरी और अब दक्षिणी क्षेत्र के काफी बड़े हिस्से बढ़ते तापमान के कारण अत्यधिक प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) से प्रभावित हुए हैं.  

• फरवरी माह में सबसे अधिक समुद्री तापमान होने के कारण ग्रेट बैरियर रीफ़ को नुकसान हुआ.

• ऑस्ट्रेलिया की पर्यटन अर्थव्यवस्था में ग्रेट बैरियर रीफ़ का योगदान अनुमानतः 4 बिलियन डॉलर प्रति होता है. लेकिन अब ग्रेट बैरियर रीफ़ अपना विश्व विरासत का दर्जा खो सकता है.

ग्रेट बैरियर रीफ़ के बारे में:

ग्रेट बैरियर रीफ़ दुनिया का सबसे बड़ा कोरल रीफ़ सिस्टम है जो ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के तट पर  कोरल सागर में स्थित है.
सबसे बड़ा कोरल रीफ़ सिस्टम 2900 से अधिक अलग किस्म की कोरल रीफ़्स से बना है. ग्रेट बैरियर रीफ़ दुनिया की सबसे बड़ी एकल संरचना है जो जीवित प्राणियों से मिलकर बनी है. यह संरचना कोरल पॉलीप्स के तौर पर प्रसिद्ध अरबों छोटे जीवों के एक साथ मिलने से बनी है.

रीफ़ से हमें पृथ्वी पर जीवन की विशाल विविधता का पता चलता है. इसे वर्ष 1980 में विश्व विरासत स्थल के रूप में चुना गया था. यह रीफ़ दुनिया के सात अजूबों में से एक है.

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