महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पोषण अभियान टेक-थॉन के आयोजन की घोषणा

Jun 27, 2018, 11:02 IST

इस सेमिनार का आयोजन पोषण अभियान को दिखाने और इस संबंध में वातावरण बनाने, विचारों का आदान-प्रदान करने तथा प्रौद्योगिकी समर्थन के लिए सहयोग और साझेदारी की संभावना तलाशने तथा पोषण की दिशा में जन आंदोलन प्रारंभ करने के लिए लाभार्थियों में कारगर व्‍यवहारिक परिवर्तन लाने के लिए किया जा रहा है.

Ministry of Women and Child Development to organise POSHAN Abhiyaan TECH-THON
Ministry of Women and Child Development to organise POSHAN Abhiyaan TECH-THON

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 28 जून 2018 को नई दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र में पोषण अभियान के संचालन के लिए प्रौद्योगिकी साझेदारी 'टेक-थॉन' पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित करने की घोषणा की.

पोषण अभियान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की एक पहल है.

 

पोषण अभियान टेक-थॉन:

  • इस सेमिनार का आयोजन पोषण अभियान को दिखाने और इस संबंध में वातावरण बनाने, विचारों का आदान-प्रदान करने तथा प्रौद्योगिकी समर्थन के लिए सहयोग और साझेदारी की संभावना तलाशने तथा पोषण की दिशा में जन आंदोलन प्रारंभ करने के लिए लाभार्थियों में कारगर व्‍यवहारिक परिवर्तन लाने के लिए किया जा रहा है.
  • यह अभियान अगले कुछ वर्षों में विभिन्‍न मानकों पर हासिल किए जाने वाले विशेष लक्ष्‍यों पर बल देता है. इससे पहले देश में शीर्ष स्‍तर पर पोषण को इतना महत्‍व नहीं दिया था.
  • पोषण अभियान में कारगर निगरानी और समय पर कार्रवाई के माध्‍यम से विशेष रूप से डिजाइन किया गया है और सॉफ्टवेयर सेवा डिलीवरी को मजबूत बनाने तथा पोषण परिणामों को सुधारने में मदद करेगा.
  • सेमिनार में भारत सरकार के मंत्री, भारत सरकार तथा राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेशों के नीति निर्माता, यूनिसेफ, विश्‍व बैंक, विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन, डब्‍ल्‍यूएफपी जैसे बहुपक्षीय सहयोगी संस्‍थानों के प्रतिनिधि, महिला और बाल विकास मंत्रालय के सहयोगी-टाटा ट्रस्‍ट, बिल और मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ), परोपकारी निजी क्षेत्र तथा सिविल सोसायटी संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे.
  • इसमें विभिन्‍न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग लेंगे और प्रौद्योगिकी समर्थन के लिए सहयोग और साझेदारी पर प्र‍काश डालेंगे.
  • प्रवासी भारतीय केंद्र की गैलरी में टेक्‍नॉलोजी तथा पेाषण अभियान पर प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी.
  • सेमिनार में लगभग 300 लोग भाग लेंगे.

 

कॉमन एप्‍लीकेशन सॉफ्टवेयर (आईसीडीएस-सीएएस):

  • कॉमन एप्‍लीकेशन सॉफ्टवेयर (आईसीडीएस-सीएएस) विशेष रूप से विकसित किया गया है जो डाटा ग्रहण करने का कार्य सक्षम करता है.
  • पोषण अभियान अग्रणी कर्मियों यानी आंगन‍वाड़ी कर्मी तथा महिला निरीक्षक को स्‍मार्ट फोन उपलब्‍ध कराकर सशक्‍त बनाता है.
  • निर्धारित सेवा डिलीवरी सुनिश्चित करता है और जहां कही आवश्‍यक हो कार्रवाई के लिए तत्‍पर बनाता है.
  • यह फिर सेक्‍टर, ब्‍लॉक, जिला, राज्‍य से राष्‍ट्रीय स्‍तर तक डैशबोर्ड के माध्‍यम से निरीक्षणकर्मियों को वास्‍तविक समय में निगरानी के लिए डाटा उपलब्‍ध कराता है.
  • वर्ष 2020 तक इस एप्‍लीकेशन को 14 लाख आंगनवाडि़यों में लागू किया जाएगा और करीब 10 करोड़ लाभार्थियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा.
  • अब यह विश्‍व में सबसे बड़ा ई-पोषण तथा स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम है. जिसमें 7 राज्‍यों (मध्‍यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्‍थान तथा उत्‍तर प्रदेश) में कर्मियों के साथ 1.1 लाख डाटा एंट्री उपकरण है जिससे 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिलेगी.

 

पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन):

  • पोषण अभियान, जिसे राष्ट्रीय पोषण मिशन भी कहा जाता है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 मार्च 2018 को राजस्थान के झुंझुंनू में शुभारंभ किया गया था.
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण संबंधी हस्तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्य निर्धारित करने तथा मार्गदर्शन करेगा.
  • यह कार्यक्रम लक्ष्यों के माध्यम से ठिगनेपन, अल्प पोषाहार, रक्त की कमी तथा जन्म के समय बच्चे के वजन कम होने के स्तर में कमी के उपाय करेगा.
  • इससे बेहतर निगरानी समय पर कार्यवाही के लिए सावधानी जारी करने में तालमेल बिठाने तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मंत्रालय और राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को कार्य करने, मार्गदर्शन एवं निगरानी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

                                      उद्देश्य:

मिशन का लक्ष्य बच्चों में उनकी लम्बाई कम बढ़ने की समस्या (स्टंटिंग) का निवारण करना भी है.

इस मिशन का मुख्य लक्ष्य कुपोषण अैर जन्म के समय बच्चों का वज़न कम होने संबंधी समस्याओं को प्रत्येक वर्ष 2% तक कम करना है.

भारत में 38.4% बच्चे स्टंटिंग के शिकार हैं.

मिशन का लक्ष्य है कि वर्ष 2022 तक इसमें कमी लाते हुए इसे 25% तक लाया जाए.

मिशन का लक्ष्य एनीमिया से पीड़ित बच्चों, महिलाओं तथा किशोरों की संख्या में प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की कमी लाना है.

यह मिशन वर्ष 2017-18 के दौरान 315 ज़िले, वर्ष 2018-19 में 235 ज़िले तथा वर्ष 2019-20 में शेष ज़िले कवर किये जाएंगे.

इस मिशन में आईसीटी (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) जैसे कई घटक शामिल होंगे, जो रियल-टाइम निगरानी प्रणाली पर आधारित होंगे.

 

                                 परिणाम:

वर्तमान में, अभियान के अंतर्गत 550 जिले कवर किए गए हैं, समग्र दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए 2020 तक चरणबद्ध तरीके से सभी 36 राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों तथा 718 जिलों को कवर किया जाएगा.

Jagran Josh
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