मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने नकारात्मक दृष्टिकोण को बरक़रार रखते हुए भारत की क्रेडिट रेटिंग को Baa2 से Baa3 कर दिया है. एजेंसी ने खुलासा किया है कि कोविड -19 महामारी, बढ़ते कर्ज और कर्ज वहन क्षमता के कमजोर होने के साथ ही वर्तमान वित्तीय संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक धीमी वृद्धि देखी जा सकती है.
भारत की रेटिंग को कम करते हुए, मूडीज ने अपना विचार कुछ इस प्रकार पेश किया कि, भारतीय नीति निर्धारण संस्थानों के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा कि वे वित्तीय जोखिमों को कम करने के साथ नियंत्रित करने के लिए भी अपनी नीतियां लागू करें.
मूडीज द्वारा कम की गई भारत की रेटिंग पर एक नजर:
| रेटिंग | कम की गई रेटिंग | पिछली रेटिंग |
| भारत की स्थानीय मुद्रा वरिष्ठ असुरक्षित रेटिंग | Baa3 | Baa2 |
| लघु अवधि की स्थानीय मुद्रा रेटिंग | प्राइम - 3 | प्राइम - 2 |
| लघु अवधि की विदेशी मुद्रा बैंक जमा की अधिकतम सीमा | प्राइम - 3 | प्राइम - 2 |
| भारत का दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा बांड | A2 | A1 |
| बैंक जमा की अधिकतम सीमा | A2 | A1 |
Baa3 रेटिंग क्या है?
Baa3 दरअसल, Baa का एक उपखंड है, जो मूडीज द्वारा दीर्घकालिक बांड्स और निवेश के लिए एक क्रेडिट रेटिंग है. Baa को Baa 1, Baa 2, Baa 3 और Baa में विभाजित किया गया है. एक Baa अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले बांड या निवेश का प्रतिनिधित्व करता है. बैंकों को Baa रेटेड बांड्स में निवेश करने की अनुमति है.
Baa3 मूडीज रेटिंग स्केल में सबसे कम निवेश ग्रेड है. अगर किसी अर्थव्यवस्था को Baa3 के तौर पर रेटिंग दी गई है, तो इसका मतलब है कि वह अर्थव्यवस्था कबाड़ या गैर-निवेश ग्रेड से सिर्फ एक पायदान ही ऊपर है.
Baa3 रेटिंग अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले निवेश या बांड का प्रतिनिधित्व करती है. ऐसे निवेशक, जो कम जोखिम वाले निवेश करने के लिए उत्सुक हैं, वे Baa3 में जरुर सावधानी बरतें, खासकर जब रेटिंग हाल ही में कम की गई हो.
मुख्य विशेषताएं
नवंबर 2017 में, मूडीज ने भारत की रेटिंग्स को Baa2 में अपग्रेड किया था, जोकि इस उम्मीद पर आधारित था कि प्रमुख सुधारों के कार्यान्वयन से भारत की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगी. हालांकि, तब से सुधारों का कार्यान्वयन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है और इसके परिणामस्वरूप मटीरियल क्रेडिट में सुधार नहीं हुआ है.
वर्ष 2019-20 में भारत की जीडीपी 4.2 प्रतिशत आंकी गई थी, जो 2009 के बाद से सबसे धीमी दर है. मूडीज का अनुमान है कि भारत की जीडीपी चालू वित्त वर्ष 2020-21 में 4% तक आ जाएगी. यहां तक कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी स्वीकार किया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2020-21 में मंदी से ग्रस्त होगी.
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