भारतीय मूल के शोधकर्ता दीपा मेले विदु के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने 10 अप्रैल 2016 को पृथ्वी की उप-परतों के हिलने से होने वाले ‘स्लो फाल्ट मूवमेंट’ के आधार पर भूकंप का पूर्वानुमान लगाने का तरीका पता लगाया.
अभी तक ये माना जाता रहा हा कि छोटे कंपन या ‘स्लो फाल्ट मूवमेंट’ से रिएक्टर पैमाना पर दो इकाई से कम के भूकंप के झटके के बाद बड़ा भूकंप आने की संभावना नहीं होती.
लेकिन सिंगापुर के नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनटीयू) के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में यह पाया कि ये कंपन न केवल आसन्न भूकंप की ओर इशारा करते हैं, बल्कि उन्हें समझने के लिए एक योग्य पैटर्न की ओर भी संकेत करते है.
एनटीयू के ‘एशियन स्कूल ऑफ द एनवायरमेंट’ के ‘अर्थ ऑब्जर्वेटरी ऑफ सिंगापुर’ के सिलवैन बारबोट के अनुसार, यह खोज ‘फाल्ट’ संचित होने और समय के साथ दबाव कम होने के बारे में हमारी समझ की और इशारा करती है.
वैज्ञानिको के अनुसार, दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में भूकंपीय खतरा शायद इंडोनेशिया में सुमात्रा के मेंतावाई भूकंपीय अंतराल में एक आसन्न बड़े भूकंप से आएगा.
टीम के नवीनतम निष्कर्ष संभावित क्षेत्र के भूकंप निगरानी में लागू किया जा सकता है, जो की इस क्षेत्र में बड़े भूकंप के बेहतर पूर्वानुमान में मददगार साबित होगा.
ये शोध पत्रिका नेचर में प्रकाशित हुई थी.
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