India’s first Centre of Excellence for Green Port & Shipping: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ग्रीन पोर्ट और शीपिंग के लिए भारत के पहले नेशनल एक्सीलेंस सेंटर की घोषणा की है. केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने इस सेंटर के स्थापना की घोषणा 'इनमार्को 2022' कार्यक्रम के दौरान की है.
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की 'लाइफ' पहल में इसे शामिल किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण की एक सामूहिक पहल है. इसकी स्थापना से भारत में ग्रीन पोर्ट के विकास में भी काफी मदद मिलेगी.
Union Minister @shipmin_india Shri @sarbanandsonwal launches India’s first Centre of Excellence for Green Ports& shipping
— PIB Shipping (@PIB_ShipMin) November 21, 2022
Details https://t.co/wTy0FM6GIP pic.twitter.com/gZAfbgauyz
नेशनल एक्सीलेंस सेंटर का उद्देश्य:
- ग्रीन पोर्ट और शीपिंग के पहले नेशनल एक्सीलेंस सेंटर का उद्देश्य देश में पत्तन, पोत परिवहन के क्षेत्र में कार्बन इमिशन को कम करना और इसे कार्बन न्यूट्रल बनाना है.
- इस एक्सीलेंस सेंटर की मदद से नियामक संरचना को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है साथ ही इस क्षेत्र में अल्टरनेटिव टेक्नोलॉजी का रोडमैप भी तैयार करना है.
- इसकी मदद से भारत के प्रमुख बंदरगाहों पर कुल बिजली मांग में ग्रीन एनर्जी सोर्स को बढाकर 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है, जो वर्तमान में 10 प्रतिशत से भी कम है. इसकी मदद से इस क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत भी बढेगा.
इन पांच विषयों पर होगा मुख्य फोकस:
ग्रीन पोर्ट और शीपिंग नेशनल एक्सीलेंस सेंटर का मुख्य फोकस इन पांच विषयों पर मुख्य रूप से होगा. जिनमे शामिल है-
1. पालिसी, रेगुलेटरी एंड रिसर्च: इस सेंटर की मदद से भारत में पोर्ट के विकास के लिए बेहतर पालिसी का निर्माण किया जायेगा साथ ही रिसर्च और डेवलपमेंट की मदद से इसके निगमन को सरल भी बनाया जायेगा.
2. ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट: नेशनल एक्सीलेंस की स्थापना का उद्देश्य यह भी है कि देश में पोर्ट के बेहतर रख-रखाव और इनके ऑपरेशन के लिए सक्षम ह्यूमन रिसोर्स का विकास सुनिश्चित किया जाये.
3. नेटवर्क: इस क्षेत्र में इसकी मदद से प्रमुख भागीदार और रणनीतिक सहयोगियों को भी जोड़ना लक्षित है, जिससे देश के पत्तन क्षेत्र को और बेहतर बनाया जा सके.
4. एक्स्प्लोर: नेशनल एक्सीलेंस सेंटर के कार्यक्षेत्र में परियोजनाओं और संसाधन के बेहतर उपयोग के लिए रोडमैप तैयार करना भी शामिल है.
5. एन्गेज: संसाधन और परियोजनाओं की संलग्नता को बढ़ावा देने के लिए इस सेंटर की मदद ली जाएगी, जिससे एक बेहतर स्ट्रक्चर का विकास किया जा सके.
नेशनल एक्सीलेंस सेंटर के लाभ:
- इस एक्सीलेंस सेंटर की मदद से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा जो पोत परिवहन और जलमार्ग में भारत की विशेष पहल मेक इन इंडिया' को सशक्त बनाएगा.
- इसकी मदद से पोर्ट डेवलपमेंट के क्षेत्र विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए फास्टट्रैक इनोवेशन को सक्षम बनाने में भी मदद मिलेगी.
- इसकी मदद से सक्षम उद्योग स्थापित करने के लिए बेहतर मानव संसाधन का विकास भी इसकी मदद से किया जा सकता है.
मैरीटाइम विजन डॉक्यूमेंट 2030:
भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने, मैरीटाइम विजन डॉक्यूमेंट 2030 के तहत कार्बन इमिशन को 2030 तक 30% तक कम करने का लक्ष्य रखा है. यह विजन डॉक्यूमेंट सस्टेनेबल मैरीटाइम सेक्टर और बेहतर ब्लू इकॉनमी का 10 साल का ब्लूप्रिंट है. यह ग्रीन शिपिंग से संबंधित भारत का एक पायलट प्रोजेक्ट है.
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