सुप्रीम कोर्ट ने 09 अगस्त 2018 को बीसीसीआई के संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को बदलते हुए गुजरात और महाराष्ट्र के क्रिकेट संघों को पुर्ण सदस्यता देने की बात कही है.
बीसीसीआई में सुधार के लिए जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने कई सिफारिशें की थी, जिनमें संशोधन करने की बीसीसीआई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया है.
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कुछ संशोधनों के साथ देश में सबसे अमीर और शीर्ष क्रिकेट संस्था के संविधान के मसौदे को भी मंजूरी दी.
मसौदे से संबंधित मुख्य तथ्य:
- सुप्रीम कोर्ट ने 'एक राज्य, एक वोट' की नीति में संशोधन किया तथा रेलवे, सेना और विश्वविद्यालयों को भी पूर्ण सदस्यता प्रदान किया.
- इसके अतिरिक्त कोर्ट ने राज्य क्रिकेट संघों से 30 दिनों के भीतर बीसीसीआई का संविधान अपनाने के लिए कहा है.
- सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज से बीसीसीआई के स्वीकृत संविधान को चार हफ्ते के भीतर अपने रिकार्ड में लेने का निर्देश दियें.
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य क्रिकेट संघों को आगाह किया कि इन सभी आदेश का पालन ना करने पर कार्रवाई होगी.
पृष्ठभूमि:
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए गठित की गई प्रशासकों की समिति (सीओए) के अध्यक्ष विनोद राय ने कहा था कि उन्होंने बोर्ड के साथ मिलकर समिति की सिफारिशों को लागू करने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके और इसी कारण अंतत: उन्हें अदालत के पास ही जाना पड़ा.
विनोद राय के अनुसार उनके बोर्ड के सदस्यों के बीच सिफारिशों पर आम सहमति बनाने के सारे प्रयास एक तरीके से नाकाम रहे.
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