अमेरिका स्थित ऑरेगोन राज्य की गवर्नर केट ब्राउन ने 09 अप्रैल 2018 को नेट न्यूट्रैलिटी बिल पर हस्ताक्षर किये. इसमें अधिक पैसे देकर अपने इन्टरनेट की स्पीड बढ़वाना गैरकानूनी है.
नया कानून राज्य की सार्वजनिक एजेंसियों के लिए उन इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) के साथ काम करना गैरकानूनी बनाता है जो भेदभावपूर्ण गतिविधियों में भाग लेते हैं जैसे कि भुगतान की प्राथमिकता और ऑनलाइन कानूनी सामग्री को अवरुद्ध करना, या कंपनियों के लिए "फास्ट लेन" बनाना. भेदभाव पूर्ण तरीके से दी जाने वाली सेवाओं से ग्राहकों को अधिक गति पर इन्टरनेट उपलब्ध कराया जाता है.
नये कानून के तहत ऑरेगोन के नागरिकों को नेट न्यूट्रैलिटी सुरक्षा प्राप्त होगी जिसे यूएस फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (एफसीसी) ने दिसंबर 2017 में समाप्त कर दिया था. इससे पहले वर्ष 2015 में नेट न्यूट्रैलिटी कानून पारित किया गया था जिसमें बिना किसी भेदभाव के सभी को समान स्पीड के साथ इन्टरनेट उपलब्ध कराये जाने के लिए कहा गया था.
हालांकि बाद में इस फैसले को पलटते हुए वर्ष 2017 में नेट न्यूट्रैलिटी कानून को समाप्त करने के लिए प्रस्ताव रखा गया. नेट न्यूट्रैलिटी में किसी को ब्लॉक करने अथवा किसी का पक्ष लिए बिना उसकी इन्टरनेट सेवा बाधित करना प्रतिबंधित कर दिया गया था.
नेट न्यूट्रैलिटी क्या है?
इंटरनेट यूज़र्स के लिए समान स्पीड और समान कीमत पर इंटरनेट उपलब्ध रहने का विचार ही इंटरनेट न्यूट्रैलिटी यानी इंटरनेट तटस्थता है. नेट न्यूट्रैलिटी एक सिद्धान्त है जिसके अनुसार इन्टरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों और सरकारों को इन्टरनेट के डाटा को सामान मानना चाहिए और उन्हें प्रयोगकर्ता को सामग्री, वेबसाइट, मंच, उपयोग, जोड़े गए उपकरण के प्रकार, या संचार की तरकीब के आधार पर कोई भेदभावपूर्ण रवैया न अपनाकर इन्टरनेट उपलब्ध कराया जाना चाहिए. यह शब्द कोलंबिया विश्वविद्यालय के मीडिया विधि के प्राध्यापक टिम वू द्वारा 2003 में पहली बार उपयोग किया गया था. भारत में भी टेलीकॉम सेक्टर की नियामक एजेंसी 'ट्राई' ने आम लोगों से राय मांगी थी और अपना फैसला 'नेट न्यूट्रैलिटी' यानी नेट तटस्थता के हक़ में दिया है.
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