राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह देवी पाटिल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 (2) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय, बंबई उच्च न्याचयालय के न्याययाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर को वरिष्ठता के क्रम में सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्तु किया.
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसएच कपाड़िया ने इन सभी को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद की 13 सितंबर 2011 को शपथ दिलाई. न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई के शपथ लेने के बाद पहली बार सर्वोच्च न्यायालय में एक साथ महिला जजों की संख्या दो हो गई. इनसे पहले न्यायाधीश ज्ञानसुधा मिश्रा सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त हैं.
इन तीनों न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण करने के बाद से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 26 से बढ़कर 29 हो गई. अनुच्छेद 124 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की संख्या 31 से अधिक नहीं होनी चाहिए.
अनुच्छेद 124 (1): भारत का एक उच्चतम न्यायालय होगा जो भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और जब तक संसद विधि द्वारा अधिक संख्या विहित नहीं करती है तब तक सात से अनधिक अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा.
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