केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए), 2010 के तहत ग्रीनपीस इंडिया के पंजीकरण रद्द कर दिया. सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन कानून (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण कथित तौर पर देश की आर्थिक प्रगति के खिलाफ कार्य करने के लिए रद्द कर दिया.
इस निर्णय का अर्थ यह होगा कि ग्रीनपीस विदेश से धनराशि प्राप्त नहीं कर सकेगा जो उसके समग्र संचालन व्यय का करीब 30 प्रतिशत है. ग्रीनपीस इंडिया में करीब 340 लोग कार्यरत हैं.
3 सितंबर 2015 को दिल्ली उच्च न्यायालय में प्रस्तुत हलफनामे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दावा किया कि ग्रीनपीस ने अपने विदेशी और घरेलू अशदानों को मिलाकर विदेशी अंशदान विनियमन कानून (एफसीआरए) का उल्लंघन किया.
ग्रीनपीस इंडिया ने सरकार की कार्रवाई को ‘अभियानों को चुप’ कराने का प्रयास करार दिया और कहा कि वह इससे विचलित नहीं होगा.
विदित हो कि भारत सरकार ने विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत 9 अप्रैल 2015 को ग्रीनपीस का पंजीकरण इस आधार पर रद्द कर दिया था कि उसने संबंधित प्राधिकारों को सूचित किए बिना ही विदेशी चंदे का उपयोग करने के लिए पांच खाते खोलकर नियमों का उल्लंघन किया.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गैरसरकारी संगठन ग्रीनपीस इंडिया को अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए नये घरेलू चंदा प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल के लिए दो खातों का उपयोग करने की अनुमति 27 मई 2015 को प्रदान की थी.
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