केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 दिसंबर 2014 को आत्महत्या करने के प्रयास से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 309 (आईपीसी) को हटा दिया. मंत्रालय ने 20वीं विधि आयोग की सिफारिश के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 309 हटाने का फैसला किया.
नतीजतन, आत्महत्या करने के प्रयास को अब भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अंतर्गत आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नही रखा जाएगा और उपरोक्त संदर्भ में आरोपी व्यक्ति को पहले की तरह 1 वर्ष की जेल की सजा और जुर्माने की सजा नही दी जाएगी.
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एपी शाह की अध्यक्षता वाले 20वें विधि आयोग ने अपनी 210वीं रिपोर्ट में कहा कि मानवीकरण और आत्महत्या करने के प्रयास को आपराधिक कृत्य की सूची से हटाने के लिए इसे (आईपीसी की धारा 309) को राज्य सूची से हटाना होगा.
कुल 18 राज्यों और चार संघ शासित प्रदेशों ने सरकार के फैसले का समर्थन किया. हालांकि, उपरोक्त प्रावधान को समाप्त करने से पहले बिहार, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों ने सतर्कता बरतने की बात कही.
बिहार ने अपने सुझाव में कहा था कि सबूत का सफाया करने के इरादे से साइनाइड गोलियों को खाने वाले और अपने प्रयास में असफल होने वाले आत्मघाती हमलावर को इस नियम के संदर्भ में अपवाद की श्रेणी में रखा जाना चाहिए.
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