भारतीय नौसेना ने 19 मई 2015 को पनडुब्बी नाशक युद्धपोत आईएनएस कावारती को अपने बेड़े में शामिल कर लिया.
कावारती एक गुप्तचर पोत है जिसे विशेषतौर पर भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया है. इस युद्धपोत का वज़न 3,300 टन है तथा इसकी लम्बाई 109.1 मीटर है.
यह पोत चार डीज़ल इंजनों की सहायता से 25 नॉट्स से अधिक की गति हासिल कर सकता है तथा इसकी क्षमता 3,400 नॉटिकल मील से अधिक है.
कावारती पिछले युद्धपोतों की भांति रेल-लेस ट्रावेसरिंग सिस्टम, फोल्डेबल हैंगर डोर, राफ्ट माउन्टेड गियर बॉक्स तथा डीज़ल इंजन से सुसज्जित है. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इससे युद्धपोत पानी की नीचे कम आवाज़ में भी अपना काम कर सकता है.
युद्धपोत का 90 प्रतिशत निर्माण भारत में ही हुआ है तथा यह परमाणु, रासायनिक तथा जैविक आक्रमणों का मुकाबला करने में सक्षम है. कावारती में लगाये गए हथियार तथा सेंसर पूर्णतया स्वदेश निर्मित हैं.
इसका डिज़ाइन नौसेना रूप-रेखा निदेशालय द्वारा बनाया गया तथा इसका निर्माण गार्डन रीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा किया गया. इस निर्माण कंपनी के साथ जून-2012 तक चार पी-28 युद्धपोतों के निर्माण का अनुबंध किया गया है जिसकी लागत 7,800 करोड़ रूपए है.
इस परियोजना के तहत भारतीय नौसेना द्वारा आईएनएस कमोर्ता को वर्ष 2014 में नौसेनिक बेड़े में शामिल किया जा चुका है. इसी श्रेणी के कदमत्त तथा किल्टन युद्धपोतों को वर्ष 2015 से 2017 के बीच नौसेना में शामिल किया जायेगा.
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