भारतीय नौसेना ने अपने नए व अब तक के सबसे बड़े विध्वंसक युद्धपोत विशाखापत्तनम का 20 अप्रैल 2015 को एक समारोह के तहत मुंबई के मझगाँव बंदरगाह से जलावतरण किया. यह आयोजन नौसेना अध्यक्ष एडमिरल आर के धोवान तथा अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की मौजूदगी में किया गया.
देश में निर्मित 163 मीटर लम्बे इस युद्धपोत को विशाखापत्तनम नाम दिया गया है. यह युद्धपोत आणविक, जैविक और रासायनिक हमलों में भी संचलित होने की क्षमता रखता है. कोलकाता क्लास पी-15बी परियोजना के तहत निर्मित यह युद्धपोत 7,300 टन वजनी है, इससे भारतीय नौसेना की ताकत में उल्लेखनीय इजाफा होगा. इसे वर्ष 2018 में भारतीय नौसेना में औपचारिक तौर पर शामिल किया जाएगा.
विशाखापत्तनम कई स्वदेशी हथियार प्रणालियों से सुसज्जित है. इसमें एक इजरायली मल्टी फंक्शन सर्विलांस थ्रेट अलर्ट राडार (एमएफ-एसटीएआर) लगा है, जो सतह से हवा में लंबी दूरी तक मार करने वाली बराक-8 श्रेणी की 32 मिसाइलों को निशाने की समस्त सूचनाएं प्रदान करेगा. इसके अलावा, विशाखापत्तनम 8 ब्रह्मोस मिसाइलों, 127 मिलीमीटर की एक बंदूक, 30 मिलीमीटर की चार रैपिड फायर बंदूकों से भी सुसज्जित है. यह 30 नॉट्स से अधिक की रफ्तार हासिल कर सकता है.
विशाखापत्तनम का निर्माण मझगांव डॉक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है, जो युद्ध पोत बनाने वाली भारत की महत्वपूर्ण कंपनी है. इस कंपनी द्वारा चार अन्य युद्ध पोत तथा छह पनडुब्बियों का भी निर्माण हो रहा है.

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