लाइदर (LiDAR): लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग प्रौद्योगिकी
फोर्ड मोटर कंपनी ने 15 नवम्बर 2015 को घोषणा की कि उन्होंने 32 एकड़ में यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन द्वारा निर्मित टेस्टिंग क्षेत्र, एमसिटी में लाइदर (LiDAR) तकनीक के साथ ड्राईवर रहित कारों का परीक्षण किया.
इसके साथ ही, फोर्ड भी गूगल, एप्पल एवं टेस्ला जैसी उन दिग्गज कम्पनियों में शामिल हो गया है जो इस तकनीक की सहायता से कारों को विकसित कर रही हैं.
लाइदर अथवा लादर, लाइट एवं राडार के मिश्रण शब्दों से बना है. यह रिमोट सेंसिंग आधारित तकनीक पर कार्य करता है जिसके अनुसार यह दूरी को लेज़र द्वारा परावर्तित प्रकाश का विश्लेषण करके निर्धारित करती है.
यह तकनीक विशेषकर कृषि क्षेत्र (फसल के स्वास्थ्य और क्षेत्र के मानचित्रण का आकलन करने के लिए), संरक्षण, सुदूर संवेदन, मौसम विज्ञान, सर्वेक्षण, सैन्य, खनन, परिवहन में उपयोग की जाती है.
ड्राईवर रहित कारों में लेज़र राडार द्वारा राहगीरों, अन्य कारों एवं रास्ते में आनी वाली अन्य बाधाओं से बचा जा सकता है.
लाइदर ईकाई लेज़र किरणें भेजता है जिससे कार का कंप्यूटर अपने आसपास के क्षेत्र का मानचित्र तैयार करता है.
भारत में, वाटर एंड पॉवर कंसल्टेंसी सर्विसेस (इंडिया) लिमिटेड (डब्ल्यूएपीसीओएस) ने सितंबर 2015 में इसी तकनीक का प्रयोग करते हुए एक एरियल सर्वेक्षण करवाया था जिसमें तेलंगाना में गोदावरी बेसिन में नदी के बैराज के निर्माण के लिए उचित स्थान का चयन करना था.
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