भारत-ब्रिटेन आर्थिक और वित्तीय वार्ता का चौथा मंत्री स्तरीय सम्मेलन 26 जुलाई 2011 को लंदन में संपन्न हो गया. इस सम्मेलन में ब्रिटेन के वित्तमंत्री जॉर्ज उसबोर्न और भारत के केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने भाग लिया. इसमें दोनों मंत्रियों की मदद के लिए उनके संबंधित मंत्रालय और नियामक निकाय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए. दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग बढ़ाने और आपसी व्यापार एवं निवेश के बढ़ावे के तरीकों को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया. आर्थिक सुधार प्रक्रिया के तहत भारत और ब्रिटेन ने मजबूत अर्थव्यवस्था और रोजगार के मौक़े में वृद्धि से अपने सभी नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराई. भारत अगले कुछ वर्षों में निर्यात दुगुना अर्थात पांच सौ अरब डॉलर तक करना चाहता है.
दोनों नेताओं ने जी-20 और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के द्वारा वे आपस में बहुआयामी सहयोग बढ़ाने के लिए समर्थन व्यक्त किया. दोनों देशों ने अपने वित्तीय असंतुलन को दूर करने और अपने-अपने देशों में व्यापार के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए ठोस कार्रवाई पर चर्चा की. विश्व अर्थव्यावस्था और वित्तीय व्यवस्था को लचीला बनाने के उद्देश्य से दोनों देश जी-20, आईएमएफ, एफएसबी और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ आर्थिक निगरानी में सुधार, पूंजी प्रवाह प्रबंधन और वित्तीय क्षेत्र में सुधार जैसे क्षेत्रों में काम करने पर सहमत हुए.
भारत सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत ढ़ांचागत क्षेत्र में 10 खरब डॉलर निवेश करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए दोनों देशों के बीच हुई वार्ता में मजबूत साझेदारी का स्वागत किया गया. दोनों देशों ने बीमा क्षेत्र में भी आपसी साझेदारी और संयुक्त उपक्रम का स्वागत किया. दोनों देशों के मध्य बैंकों की भूमिका की भी चर्चा की गई. भारत में विदेशी बैंकों के मामले में ब्रिटेन के बैंकों की 50 प्रतिशत शाखाएं है, जबकि ब्रिटेन में विश्व के किसी अन्य देश के मुकाबले भारत के बैंकों की अधिक शाखाएं है.
दोनों देशों ने पूरे वर्ष प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करने का वायदा किया. भारत-ब्रिटेन आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता की पांचवीं बैठक वर्ष 2012 में भारत में आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
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