भारती एयरटेल ने 6 अफ्रीकी देशों में 3500 टावरों के लिए ईटन टावर्स के साथ समझौते की घोषणा 8 सितंबर 2014 को की. समझौते के तहत, भारती एयरटेल ने ईटन को ये टावर बेचने और लीज पर लेने के लिए दस वर्षों के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया. सूत्रों के मुताबिक, यह समझौता कोई 600 से 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है.
समझौते में शामिल छह देशों में घाना, युगांडा और केन्या है लेकिन नाइजीरिया नहीं है. नाइजीरिया भारती एयरटेल का सबसे बड़ा अफ्रीकी बाजार है.
पृष्ठभूमि
3500 टावरो को ईटन को बेचा जाना एयरटेल की प्रबंधन लागत में कटौती करने के लिए 20 अफ्रीकी देशों में 15000 से अपने अधिकांश मोबाईल फोन टावरों को बेचने की योजना का एक हिस्सा है. सुरक्षा लागतों और बिजली की कमी जैसी वजहों से अफ्रीका में लागत आम तौर पर बहुत महंगा होता है.
इससे पहले जुलाई 2014 में भारती एयरटेल ने अफ्रीका के चार देशों में टावर बेचने के लिए हेलियस टावर्स अफ्रीका– एक कंपनी जिसका स्वामित्व निवेशकों के समूह के पास है, के साथ एक समझौता किया था.
वर्ष 2010 में कुवैत के जईन से अफ्रीका में घाटे में चल रही मोबाइल फोन ऑपरेशन खरीदने के बाद से उच्च परिचालन लागत और भारी कर्ज के बोझ के बीच भारती एयरटेल को आज भी लाभ कमाने का इंतजार करना पड़ रहा है.
टिप्पणी
समझौता भारती एयरटेल और ईटन टावर्स दोनों ही के लिए फायदेमंद है. एक तरफ भारती एयरटेल द्वारा संपत्ति के बेचे जाने से उसे निवेशकों को पैसा लौटाने में मदद मिलेगी. जून 2014 के आखिर तक, भारती एयरटेल पर 9.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का शुद्ध कर्ज था इसमें से 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज तो अफ्रीकी दूरसंचार परिचालन को खरीदने की वजह से था.
दूसरी तरफ, यह समझौता ईटन टावर्स को सात अफ्रीकी देशों में अपना विस्तार करने में सक्षम बनाएगा और उसे 5000 से अधिक टावर्स देगा. समझौते की शर्तों के मुताबिक ईटन टावर अन्य वाहकों के साथ भारती टावरों को भी लीज पर लेगा.
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