संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मिस्र, जापान, सेनेगल, यूक्रेन और उरुग्वे को दो वर्ष के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना. दो वर्ष की यह अवधि एक जनवरी 2016 से शुरू होगी. नये सदस्यों देशों को 18 अक्टूबर 2015 को मतदान द्वारा चुना गया. वे 31 दिसंबर 2017 तक अपनी सेवाएं देंगे.
क्षेत्रीय रूप से बांटी गयी जिन पांचों सीटों के लिए 2015 में चुनाव होना था, उनमें से दो सीटें अफ्रीकी समूह (मौजूदा समय में चाड और नाइजीरिया के पास) एक सीट एशिया प्रशांत समूह (मौजूदा समय में जॉर्डन के पास), एक सीट लातिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के समूह के लिए (मौजूदा समय में चिली के पास) और एक सीट पूर्वी यूरोपीय समूह (मौजूदा समय में लिथुआनिया के पास) के लिए हैं. इस वर्ष पश्चिमी यूरोपीय एवं अन्य समूह किसी सीट पर नहीं लड रहे हैं क्योंकि इसकी दो सीटों पर हर सम कलैंडर (इवन कैलेंडर) वर्ष में चुनाव होता है. ये सीटें मौजूदा समय में न्यूजीलैंड और स्पेन के पास हैं. सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार रखने वाले पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं. वर्ष 2016 के अंत तक परिषद में रहने वाले अस्थायी सदस्य अंगोला, मलेशिया, न्यूजीलैंड, स्पेन और वेनेजुएला हैं. भारत सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए दबाव बना रहे विकासशील देशों का नेतृत्व कर रहा है ताकि इसमें अधिक देशों का प्रतिनिधित्व बढ सके और यह 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरुप बन सके.
विदित हो कि 193 सदस्यीय महासभा ने सर्वसम्मति से दस्तावेज के आधार पर सुरक्षा परिषद सुधार पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें सत्र में वार्ता शुरू करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें सुधार के बाद परिषद में वीटो के इस्तेमाल और स्थायी एवं अस्थायी सीटों की संख्या बढाने के संबंध में विभिन्न देशों के रुख शामिल होंगे. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाये रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद की है. परिषद के हर सदस्य के पास एक वोट होता है. चार्टर के तहत संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश परिषद का आदेश मानने के लिए बाध्य हैं.
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