मुद्रा विनिमय के माध्यम से विदेशी व्यापार की संभावनाओं की तलाश हेतु सरकार ने समिति का गठन किया

Aug 28, 2013, 11:18 IST

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 27 अगस्त 2013 को मुद्रा विनिमय के माध्यम से विदेशी व्यापार की संभावनाओं का पता लगाने हेतु एक समिति का गठन किया.

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 27 अगस्त 2013 को मुद्रा विनिमय (करेंसी स्वैपिंग, Currency Swapping) के माध्यम से विदेशी व्यापार की संभावनाओं का पता लगाने हेतु एक समिति का गठन किया. इस समिति का गठन विदेशी व्यापार में लगातार बढ़ते घाटे एवं विदेशी मुद्राओं विशेषकर डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत को रोकने के लिए मुद्रा विनिमय जैसे विकल्पों के प्रयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए किया गया है. इस समिति को चार सप्ताह में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है.

विदेशी व्यापार को मुद्रा विनिमय के माध्यम से करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव होंगे. साथ ही, इस समिति में विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों, आद्योगिक संगठनों और निर्यात समूहों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

समिति के गठन के बारे में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, आनंद शर्मा ने कहा, “भारत आरंभिक तौर पर चार देशों के साथ करेंसी स्वैपिंग के माध्यम से व्यापार कर सकता है जिनमें मध्य पूर्व एवं अन्य एशियाई देश शामिल हो सकते हैं.”

विदित हो कि हाल ही में भारत ने भूटान के साथ मुद्रा विनिमय का समझौता किया है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने भी मुद्रा विनिमय के माध्यम से व्यापार किये जाने को लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया था जिसमे दक्षिण अफ्रीका के साथ मुद्रा विनिमय के समझौते के लिए सिफारिश की गयी थी.

मुद्रा विनिमय (करेंसी स्वैपिंग, Currency Swapping)

मुद्रा विनिमय दो संस्थानों (देशों) के बीच किसी ऋण के विनिमय किये जाने वाले पहलुओं (मूलधन तथा ब्याज के भुगतानों) का एक देश की मुद्रा के दूसरे देश की मुद्रा के बराबर ऋण के मूल्य को समतुल्य करने हेतु एक विदेशी मुद्रा समझौता है. मुद्रा विनिमय प्रतियोगात्मक लाभ से प्रेरित होते हैं. मुद्रा विनिमय किसी देश के केंद्रीय बैंक के द्वारा किये जाने वाले नकदी विनिमय से भिन्न होता है.

मुद्रा विनिमय के उपयोग

•    सस्ता ऋण प्राप्त करना और बैक-टू-बैक (लगातार) ऋण का उपयोग करते हुए वांछित मुद्रा में कर्ज का विनिमय करना.
•    मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सुरक्षित रहना (जोखिम कम करना)

मुद्रा विनिमय की शुरूआत 1970 में ब्रिटेन में विदेशी मुद्रा नियंत्रणों से निपटने के लिए की गयी थी. साथ ही, 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान संयुक्त राज्य संघीय संचय प्रणाली द्वारा केंद्रीय बैंक तरलता विनिमय की स्थापना करने के लिये मुद्रा विनिमय लेनदेन की संरचना का प्रयोग किया गया था.

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