प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा को 20 जनवरी 2011 को शुरू किया. मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा के तहत मोबाइल उपभोक्ता को बिना नंबर बदले मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी बदलने की आजादी है.
ज्ञातव्य हो कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा के बारे में दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI: Telephone Regulatory Authority of India) ने दिशा-निर्देश जारी किया था. ट्राई के दिशा-निर्देशों के मुताबिक उपभोक्ता को सेवा प्रदाता कंपनी को बदलने के लिए 1900 नंबर पर एक एसएमएस करना है. जहां से उपभोक्ता को एक पंजीयन नंबर दिया जाएगा. साथ ही उपभोक्ता से उस कंपनी का नाम पूछा जाएगा जिसकी सेवा वह लेना चाहता है. उसके बाद 8 दिनों के भीतर बिना नंबर बदले उपभोक्ता को उसकी पसंदीदा कंपनी का कनेक्शन मिल जाएगा.
ज्ञातव्य हो कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा की शुरुआत सबसे पहले हरियाणा में नवंबर 2010 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की गई थी.
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा के लिए ट्राई की शर्तें:
• मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी बदलने के लिए 19 रुपये की फीस वसूली, हालांकि कंपनी को इस बारे में आजादी कि वह शुल्क ले या नहीं.
• एक तकनीक से दूसरी तकनीक में जाना संभव नहीं. यानी जीएसएम मोबाइल वाले सीडीएमए आधारित कनेक्शन नहीं ले सकते.
• किसी एक कंपनी की सेवा कम से कम 90 दिन के बाद ही छोड़ सकते.
• अपने पुराने मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के पास जाने के लिए भी कम से कम 90 दिन की समय सीमा
• दूसरे सेवा प्रदाता कंपनी के पास जाने से पहले मौजूदा कंपनी की सभी बकाया राशि का भुगतान ग्राहक को करना है.
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा से कंपनियों पर बेहतर सेवा देने का दबाव बढ़ना तय है, क्योंकि उपभोक्ता को दूसरे कंपनी की मोबाइल सेवा लेने की स्वतंत्रता दी गई है. कंपनियों के लिए अब नए उपभोक्ता बनाने के साथ-साथ पुराने उपभोक्ताओं को बनाए रखने की प्रतिस्पर्धा होगी.
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