15 अक्टूबर 2015 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तीन देशों, जॉर्डन, फिलिस्तीन एवं इज़राइल की यात्रा संपन्न हुई. इस छह दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने हेतु विभिन्न समझौतों एवं समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये.
उनकी इस यात्रा के दौरान, इन देशों के राष्ट्र प्रमुखों से भी मिले. इनमें इज़राइल के राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की. उन्होंने जॉर्डन के शाह महामहिम अब्दुल्ला द्वितीय और प्रधानमंत्री अब्दुल्ला इनसौर के साथ बैठक की तथा फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास, प्रधानमंत्री डॉ. रमी हमदुल्ला और प्रमुख राजनीतिक दलों नेताओं से भी मुलाकात की.
उनकी यात्रा के दौरान, वे जॉर्डन में 10 से 12 अक्टूबर 2015 तक, फिलिस्तीन में 12 से 13 अक्टूबर 2015 तक एवं इज़राइल में 13 से 15 अक्टूबर 2015 तक रुके. इन देशों की यात्रा भारत के किसी भी राष्ट्रपति द्वारा पहली बार की गयी यात्रा थी.
यात्रा के मुख्य बिंदु
• राष्ट्रपति ने भारत के परिवर्तन में इज़राइल को आमंत्रित किया तथा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में इजरायल की भागीदारी की मांग भी की.
• उन्हें जेरूसलम में हिब्रू विश्वद्यालय, जॉर्डन के विश्वविद्यालय और फिलिस्तीन में अल-कुद्स विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया.
• राष्ट्रपति ने इन देशों को भारत में निवेश करने के लिए भी आमंत्रित किया.
• सभी तीन देशों में शैक्षिक प्रतिनिधिमंडल ने समझौता ज्ञापन आदान प्रदान किया.
• फिलिस्तीन स्थित रामल्लाह में एक सड़क का नाम शरिया-ए-अल-हिन्द (भारत सड़क) तथा एक गोल चक्कर (राउंड अबाउट) का नाम मिदान-ए-अल-हिन्द रखा गया.
• राष्ट्रपति ने जॉर्डन स्थित अम्मान में एक सड़क का उद्घाटन किया जिसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया.
• व्यापार और आर्थिक, निवेश और सहयोग हेतु जॉर्डन के साथ छह समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये.
• भारत ने फिलिस्तीन को 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बजटीय सहायता प्रदान की.
• दोहरे कराधान से बचाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हेतु इज़राइल के साथ छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गये.
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