वन्य जीव जंतु संरक्षण पर काम करने के लिए दो भारतीयों डॉ आनंद कुमार और डॉ प्रमोद पाटिल को विटले सम्मान से नवाजा गया. विटले अवार्ड को ग्रीन ऑस्कर भी कहा जाता है.
यह सम्मान लन्दन की रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी में आयोजित एक समारोह में दिया गया. पुरुस्कार के विजेताओं को 35000 पौंड दिए गए.
डॉ कुमार को यह सम्मान दक्षिण भारत में मानव को हाथियों के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु एक नया संचार तंत्र विकसित करने के लिए दिया गया. डॉ पाटिल को यह सम्मान राजस्थान के थार मरुस्थल में आइयकोनिक पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की प्रजाति के संरक्षण के लिए दिया गया. यह सम्मान जीव जंतु संरक्षण के लिए कुल सात लोगों को दिया गया. इस पुरुस्कार के अन्य विजेता पनुत हदिसिस्वोयो, रोसामीरा गुलेन, आर्नोड डेस्बिज, इनोयम इमोंग, जेसन इबानेज हैं.
पनुत हदिसिस्वोयो: इंडोनेशिया के पारिस्थितिकी तंत्र में सुमात्रन आरेंगूटान्स को बचाने के प्रयासों के लिए
रोसामीरा गुलेन: उत्तरी कोलंबिया में कपास टॉप तमरिन संरक्षण के लिए
आर्नोड डेस्बिज: ब्राजील सेराडो में विशाल अर्माडीलो संरक्षण के लिए
इनोयम इमोंग: नाइजीरिया के एमबीई पहाड़ों के बीच क्रॉस नदी गोरिल्ला को बचाने के लिए
जेसन इबानेज: मिंडनाओ द्वीप पर फिलीपीन्स ईगल को बचाने में मदद करने के लिए
आनंद कुमार के कार्य
डॉ कुमार ने एक नेटवर्क ( EIN) विकसित किया, जो मनुष्य को हाथियों के प्रति संवेदनशील बनाता है. यह नेटवर्क मानव के परम्परागत नकारात्मक स्वभाव को कम करने और हाथियों के प्रति मानव की सह्नशीलता को बढ़ाने हेतु सचेत करता है. डॉ कुमार द्वारा विकसित यह नेटवर्क प्रशिक्षित व जिम्मेवार लोगों को हाथियों के पद चिन्हों और उनकी गतिविधियों की जानकारी देता है, हाथियों के नजदीक आने पर इसकी सूचना संदेश, कॉल और मोबाइल से संचालित लाल बत्ती संकेत के माध्यम से लोगों को मिल जाती है. यह संकेतक निश्चित स्थानों पर लगाए गए होते हैं.
डॉ. कुमार की चेतावनी प्रणाली की सफलता उनकी परियोजना सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व को भी प्रोत्साहित करने में मदद करती है.
डॉ प्रमोद पाटिल के कार्य
पेशे से एक चिकित्सक रहे डॉ. पाटिल ने 2003 में दवाओं का व्यवसाय छोड़कर अपना जीवन आइकोनिक पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की प्रजाति (Ardeotis nigriceps) के संरक्षण में लगाने का निर्णय लिया. आइकोनिक पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अवैध शिकार के कारण, उसकी आबादी तेजी से घट रही है. डॉ. पाटिल ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी घटने का कारण उनके चरागाहों, प्राकृतिक वास और समुदाय के साथ रहने की प्रवृति में ह्रास को माना है. पाटिल और उनकी टीम बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी ( बीएनएचएस ) ने राज्य वन विभाग के साथ थार के रेगिस्तान में काम करना शुरू किया. उन्होंने लोगों को समझाया कि वे वन्य अधिकारियों के साथ सकारात्मक संबंध विकसित करें. उनकी टीम ने भूमि के बेहतर प्रबंधन के लिये वहां के निवासियों को प्रोत्साहित किया,जिस पर दोनों समुदाय मानव जीवन और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड निर्भर करते हैं.
उनका मुख्य कार्य ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की विभिन्न प्रजातियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित करना और अवैध शिकारियों की गतिविधियों को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करना है.
विटले अवार्ड्स
यह सम्मान एक वार्षिक पुरुस्कार है, जो विटले फंड फॉर नेचर द्वारा दिया जाता है. पुरस्कार दुनिया भर में प्रभावी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संरक्षण के कार्यकताओं और नेतृत्व को चिन्हित और उन्हें सम्मानित करता है. ग्रीन ऑस्कर के नाम से जाना जाने वाला यह पुरुस्कार वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिया जाता है.
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