मुंबई की एक विशेष अदालत ने वर्ष 1992 में हुए शेयर बाजार घोटाले के मुख्य आरोपी हर्षद मेहता की संपत्तियां बेचकर विभिन्न वित्तीय संस्थानों की देनदारियां चुकाने का निर्णय दिया. विशेष अदालत ने 13 सितंबर 2011 को अपने निर्णय में बताया कि हर्षद मेहता की संपत्तियों की नीलामी से बैंकों, वित्तीय संस्थानों और आयकर विभाग की 650 करोड़ रुपये की देनदारी चुकाई जाए.
विशेष अदालत ने हर्षद मेहता की संपत्तियों के लिए नियुक्त संरक्षक को आदेश दिया कि इन संपत्तियों को बेचकर आयकर विभाग को 28.34 करोड़ रुपये, भारतीय स्टेट बैंक को 259.65 करोड़ रुपये, एसबीआइ कैप्स को 16.25 करोड़ रुपये और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को 345.76 करोड़ रुपये का भुगतान करे.
ज्ञातव्य हो कि वर्ष 1992 में हुए शेयर बाजार घोटाले के चलते हर्षद मेहता की देनदारियां चुकाने के लिए दूसरी बार उसकी संपत्तियों में से रकम जारी करने की इजाजत दी गई. पहली बार मार्च 2011 में हर्षद मेहता की संपत्तियों के लिए नियुक्त संरक्षक सतीश लूंबा ने आयकर विभाग और स्टेट बैंक को 2200 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.
वर्ष 1992 में हुए शेयर बाजार घोटाले: वर्ष 1992 में बैंकों के बीच होने वाले नकदी हस्तांतरण के नाम पर अवैध तरीके से रकम जुटाई गई थी. इस रकम को बाद में शेयर बाजार में निवेश कर दिया गया था, जिससे शेयर बाजार काफी ऊपर पहुंच गया था. बाद में अवैध हस्तांतरण की खबर उजागर होने पर बैंकों ने जब हर्षद मेहता और अन्य आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो शेयर बाजार औंधे मुंह गिर गया था.
शेयरों में आई तेज गिरावट से लाखों निवेशकों को काफी घाटा हुआ था. धोखाधड़ी के इसी आरोप में हर्षद मेहता पर मामले दर्ज किए गए थे. वर्ष 2002 में हर्षद मेहता की मृत्यु हो गई थी. इस घोटाले के रहस्योद्घाटन से शेयर बाजार, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच गहरी साठगांठ भी सामने आई थी.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation