सउदी अरब सरकार ने प्रवासियों के लिए अपनी कानूनी हैसियत दुरूस्त करने या स्वदेश लौटने की समय सीमा 4 नवम्बर 2013 तक बढ़ा दी. यह सीमा 3 जुलाई 2013 को खत्म हो रही थी. सउदी शाह ने 2 जुलाई 2013 को यह फरमान जारी किया. यह समय सीमा दूसरी बार बढ़ाई गई है.
इससे उन प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने नौकरी में बदलाव संबंधी दस्तावेज दुरूस्त नहीं कराए थे. कई वाणिज्य परिसंघों, स्वैच्छिक संगठनों और कल्याण एजेंसियों ने सउदी सरकार से यह समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी. रियाद में भारतीय दूतावास ने इस आदेश का स्वागत किया है.
सउदी अरब सरकार की कार्रवाई के पीछे मकसद श्रम सुधारों (निताकत कानून) को अमल में लाना है, जिसे वर्ष 2012 में लागू किया गया था. इन सुधारों में सऊदी और विदेशी कामगारों का कोटा तय किया गया था. इसके साथ ही कुछ नौकरियां खास तौर से स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित की गई हैं. कंपनियां कोटा से निबटने हेतु ऐसे कामगारों को काम पर रख लेती हैं जिन्हें दूसरी कंपनियों ने आधिकारिक तौर पर स्पांसर किया है.
क्या है निताकत कानून?
• इस कानून के अनुसार, कम से कम 49 कर्मचारियों वाली निजी कंपनियों में 10 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना बाध्यकारी बना दिया गया है.
• निताकत के तहत श्रम बाजार को 41 गतिविधियों (कामों) में बांटा गया है और हर काम की पांच श्रेणियां-विशाल, बड़ा, मध्यम, लघु एवं अति लघु बनाई गई हैं. इस प्रकार कुल 205 श्रेणियां बनाई गई हैं.
• इस नीति के तहत कंपनियों द्वारा रोजगार के स्थानीयकरण का मूल्यांकन किया जाना है और उन्हें एक्सीलेंट, ग्रीन, येलो एवं रेड ग्रेड प्रदान किए जाने हैं.
• उच्चतम स्तर पर स्थानीय लोगों को रोजगार देने वाली कंपनियों को कई तरह की राहत एवं प्रोत्साहन दिए जाने हैं, जबकि रोजगार का कम स्थानीयकरण करने वाली कंपनियों पर स्थानीय लोगों को रोजगार देने का दबाव डाला जाना है और उन्हें नया वर्क परमिट भी नहीं दिया जाना है.
बेरोजगारी दूर करने के उद्देश्य से सऊदी अरब में श्रम नीति निताकत लागू...
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