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बहमनी साम्राज्य

बहमनी साम्राज्य, मध्यकालीन भारत का मुस्लिम साम्राज्य था जिसका विस्तार दक्षिण भारत के दक्कन में था.
Oct 8, 2014 15:08 IST
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बहमनी साम्राज्य, मध्यकालीन भारत का मुस्लिम साम्राज्य था जिसका विस्तार दक्षिण भारत के दक्कन में था. इसकी स्थापना 1347 ईस्वी में तुर्की गवर्नर अल्लाह-उद्दीन हसन बहमन द्वारा हुई जिसे कि हसन गंगू के नाम से भी जाना जाता है. इसने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के विरुद्ध सफलता पूर्वक विद्रोह किया था.

बहमनी साम्राज्य का सदैव ही विजयनगर साम्राज्य से दक्क्न पर अधिकार के लिए युद्ध होता रहा. 1347 ईस्वी से 1425 ईस्वी तक बहमनी साम्राज्य की राजधानी गुलबर्ग थी. इसके बाद 1425 ईस्वी में यह बिदार में स्थांतरित हो गयी.

यह साम्राज्य,  महमूद गवाँ के काल में अपनी पराकाष्ठा पर पहुचा जो कि साम्राज्य का प्रधानमंत्री था. 1482 ईस्वी में इसकी हत्या मुहम्मद शाह तृतीय के द्वारा कर दी गयी जो कि दक्कनि व आफ्कीस की शत्रुता का परिणाम था. इसकी हत्या के बाद ही साम्राज्य का विघटन प्रारंभ हो गया. साम्राज्य 5 हिस्सों में विघटित हुआ जो की इस प्रकार थे: आदमशाही (अहमदनगर), आदीलशाही (बीजापुर), कुतुबशाही (गोलकुंडा), बारीशाही (बिदार) तथा बेरार का ईमादशाही साम्राज्य (इसे अहमदनगर द्वारा आदिकार में ले लिया गया). बीजापुर, अहमदनगर और बेरार ने 1490 ईस्वी में स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया, बिदार ने 1492 ईस्वी में तथा गोलकुंडा ने 1512 ईस्वी में अलग किया. बहमानी साम्राज्य का अंतिम शासक कालीमूल्लाह था.

बहमनी साम्राज्य के कुलीन वर्ग को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है: आफ़क़िस एवं द्क्किनि I द्क्किनि, साम्राज्य के देशी मूल तथा आफ़क़िस विदेशी मूल के थे.