मांग का नियम (Theory of Demand)

मांग का नियम हर व्यक्ति हर दिन उपयोग में लाता है क्योंकि सामान्यतः उपभोक्ता अधिक कीमत पर वस्तु की माँग कम तथा कम कीमत पर वस्तुओं की माँग अधिक करते हैं। किसी वस्तु की मांग उस वस्तु की कीमत के साथ-साथ उपभोक्ता की आय, रूचि तथा अन्य प्रतिस्थानापन्न और पूरक वस्तुओं पर भी निर्भर करती है |

अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण नियमों के अंतर्गत मांग का नियम अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है| यदि आप मांग के नियम को समझ जाएँ तो कोई भी वस्तु क्यों कितनी महंगी और क्यों उसकी मांग ज्यादा या कम है इस बात का अंदाजा लगाया जाना आसान हो जाता है| जहाँ पर पूर्ति है वही पर मांग है और जहाँ मांग हैं वही पर कोई भी पूर्तिकर्ता अपने सामानों की पूर्ति करने के लिए तत्पर रहता है| बहुत सारे ऐसे कारक होते हैं जोकि मांग और पूर्ति के नियम की बेहतर ब्याख्या करते हैं| इसके अलावा बहुत सारे ऐसे कारक होते हैं जोकि मांग और पूर्ति के नियमों की व्याख्या करते हैं|

परिभाषा

मांग के नियम परिभाषा के अंतर्गत बस्तुओं और उनकी मात्रा एवं उनके मूल्य के मध्य के संबध की व्याख्या कि जाती है| बाजार में कोई बस्तु कितनी मात्रा में उपलब्ध है और उसकी कितनी कीमत ली जा रही है यही इस परिभाषा के अंतर्गत व्याख्यायित किया जाता है| बाजार में यदि किसी बस्तु की मात्रा ज्यादा उपलब्ध है तो इसका सीधा सा अर्थ है की उसकी कीमत कम होगी| लेकिन यदि उसकी मात्रा कम है तो जाहिर सी बात है कि उसकी कीमत ज्यादा होगी|लेकिन कुछ नियम ऐसे भी है जोकि इस मांग के नियम की सही परिभाषा नहीं दे पाते हैं|

उदहारण के लिए यदि आप किसी नए एप्पल फ़ोन के शौक़ीन हैं और उसकी कीमत ज्यादा है लेकिन आपकी आमदनी भी ज्यादा है जिसकी तुलना में आप को एप्पल की कीमत अदा करना ज्यादा महंगा साबित नहीं हो  रहा हैं तो आप आसानी से उस सामान को खरीद सकते हैं|

आसान शब्दों में हम कह सकते हैं कि यदि बाजार में किसी वस्तु की कीमत ज्यादा है तो जाहिर सी बात है कि उसके खरीदार कम होंगे और यदि उस वस्तु की कीमत कम है तो भी जाहिर सी बात है कि उसके खरीदार ज्यादा होंगे| लेकिन एक चीज को और भी ध्यान देना होगा की यदि उस बस्तु की मांग कम है और उसकी बाजार में मौजूदगी ज्यादा है तो भी उसके खरीदार कम होंगे|

अर्थशास्त्री मांग के नियम में कठोरता से विश्वास करते हैं| यह नियम उनके लिए अत्यंत आवश्यक होता है जोकि अर्थशास्त्र का अध्ययन नहीं करते हैं|

मांग के प्रकार

मांग के कई प्रकार होते हैं जिनका वर्णन निम्नवत है-

नकारात्मक मांग-

बाजार में यदि सामान की मौजूदगी ज्यादा है तो संभव है की उसकी मांग कम हो क्योंकि सामान ज्यादा होने की वजह से ही उसकी कीमत कम है और उसकी खरीदारी नहीं हो पा रही है| बाजार में सामान का पूर्तिकर्ता सर्वप्रथम बस्तु की मांग के बारे में काफी गहराई से विश्लेषण करता है उसके बाद ही उस सामान की बाजार में आवक को बढाता है| क्योकि यदि वह सामान को बिना विश्लेषण के बाजार में भेज देता है तो उसको वस्तुओं के सही दाम नहीं मिल पाते हैं और उसके नुकसान का सामना करना पड़ता है|

शून्य मांग-

बाजार में बहुत सारी वस्तुओं की कोई भी मांग नहीं होती है लिहाजा उन्हें शून्य मांग का सामना करना पड़ता है| हालांकि बाजार में ऐसी चीजों की संख्या न के बराबर होती है |

गिरती हुई मांग-

जब बाजार में किसी एक वस्तु की मांग में क्रमशः गिरावट दर्ज की जा रही हो तो इस तरह की मांग को गिरती हुई मांग कहते हैं|

Jagranjosh

image source:The Market Oracle

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अनियमित मांग-

कभी-कभी वस्तुओं की अनियमित मांग का सामना करना पड़ता है| अर्थात जैसे ही वस्तु की जरुरत महसूस होती है उसकी मांग बढ़ जाती है लेकिन आफ़-सीजन में उसकी मांग नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है और वस्तु को अनियमित मांग का सामना करना पड़ता है|

बेलोच मांग-

बाजार में जब वस्तु की मांग हमेशा बनी रहती है तो इस स्थिति को पूरी मांग कहते है| होता यह है की जब वस्तु की गुणवत्ता अच्छी होती है तो इसकी मांग में हमेशा उछाल बना रहता है और लोगों के बीच उसकी मांग बनी रहती है|

मांग का निर्धारण-

मांग का नियम हमेशा कुछ बातों पर निर्भर करता है; क्योंकि जैसे ही वस्तु की कीमत कम होती है उसकी मांग में वृद्धि होने लगती है| इसी तरह अन्य तथ्य भी कार्य करते हैं जिनका जिक्र निम्नवत है-

आय- किसी भी व्यक्ति की आय के अनुसार मांग में भी इजाफा होता है| यदि किसी व्यक्ति की आय अधिक है तो जाहिर सी बात है की उसके द्वारा किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदने में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा| अर्थात धनी ग्राहक मांग के नियम को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करते हैं|

ग्राहकों की प्राथमिकता- वस्तुओं की गुणवत्ता भी वस्तु के मांग में वृद्धि करती है| यदि किसी सामान की गुणवत्ता बेहतर हैं तो जाहिर सी बात ही कि ग्राहक उन वस्तुओं को खरीदने में खासी दिलचस्पी रखेगा|

खरीदारों की संख्या- बाजार में ग्राहकों की संख्या भी किसी वस्तु की मांग को प्रभावित करती है| यदि किसी वस्तु की बाजार में मात्रा कम है तो जाहिर सी बात है कि उसके खरीदारों की संख्या में वृद्धि होगी और मांग में इजाफा होगा|

सम्बंधित वस्तु की कीमत-

  1. वैकल्पिक वस्तुओं की कीमतें भी अन्य वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करती हैं| वैकल्पिक वस्तुओं की कीमतें और अन्य वस्तुओं की कीमतें एक दूसरे से सम्बंधित होती है| क्योकि कम कीमत में बेहतर वस्तु की चाह सभी की होती है|
  2. सहायक वस्तुओं की जरुरत अन्य वस्तुओं के साथ होती है; इनका इस्तेमाल अन्य वस्तुओ के साथ ही होने के कारण इनकी जरुरत भी ज्यादा होती है| अतः सहायक वस्तुओं की मांग अन्य वस्तुओं की कीमतों से प्रभावित नहीं होती हैं|

भविष्य की आस-

  1. भविष्य की कीमत- किसी भी वस्तु की मांग में इजाफा तब होता है जब किसी ग्राहक को इस बात का अंदाजा हो जाता हैं की अमुक वस्तु की कीमत भविष्य में बढ़ेगी| साथ ही यदि किसी वस्तु की कीमत के भविष्य में घटने की उम्मीद होती है तो उसकी मांग में भी कमी होती है|
  2. भविष्य की आय-  किसी भी वस्तु की मांग में इजाफा तब होता है जब किसी ग्राहक को इस बात का अंदाजा हो जाता हैं कि उसकी आय में भविष्य में वृद्धि होगी| साथ ही यदि इस बात का अंदाजा हो जाये कि ग्राहक की आय भविष्य में घटेगी तो उसकी मांग में भी कमी होती है|

निष्कर्ष- मांग एवं पूर्ति का नियम एक-दूसरे से संबधित है| बाजार में यदि किसी सामान की मांग है तो उसकी पूर्ति अपने-आप संभव होने लगती है| लेकिन यदि पूर्ति हो रही हो तो यह कोई जरुरी नहीं कि उसकी मांग बाजार में मौजूद हो ही| जैसे ही किसी वस्तु की कीमत में इजाफा होता है अपने आप उसकी मांग में कमी होने लगती है; और उत्पादक को  उसकी पूर्ति भी घटानी पड़ती है| बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति में प्रतियोगियों के बीच वस्तुओं  की पूर्ति और उनकी कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जाता है| मांग एवं पूर्ति के नियमों को जानकर ही कोई देश अपने सामानों की किसी देश में पूर्ति को संभव बनाता है|

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