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विजयनगर साम्राज्य (1336ईस्वी-1646ईस्वी): एक परिचय

विजयनगर साम्राज्य पर चार राजवंशों ने शासन कार्य किया था- संगम राजवंश, सलुव राजवंश, तुलुव राजवंश और आरविडू राजवंश.
Sep 19, 2014 11:48 IST
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विजयनगर साम्राज्य की स्थापना दक्कन में तुगलक शासन के खिलाफ विद्रोह के परिणामस्वरूप हरिहर प्रथम और उनके भाई बुक्का राय प्रथम ने 1336 ईस्वी में किया गया था. इस साम्राज्य का नाम विजयनगर की राजधानी के नाम पर पड़ा था. आधुनिक विश्व विरासत स्थल हम्पी जोकि वर्तमान में एक खंडहर में बदल चुका है आधुनिक कर्नाटक, भारत में अवस्थित है. यहाँ पर विविध साम्राज्यों नें  1646 ईसवी तक शासन कार्य किया था जिसके परिणामस्वरूप इसका अस्तित्व बना रहा. 1565 ईस्वी में इस स्थल नें दक्कन के सुल्तानों के संयुक्त आक्रमण के परिणामस्वरूप अपना महत्व खो दिया.

इस साम्राज्य में त्रिचनापल्ली, मैसूर, कनारा, चिन्गल्पेटऔर कांचिवरम  के प्रदेश शामिल थे. यह भारत के दक्षिणी भाग पर अवस्थित था. यह तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित था.

यह साम्राज्य बहमनी साम्राज्य के मुस्लिम शासकों के साथ युद्ध की स्थिति में हमेशा से व्यस्त रहता था. इन शासकों को सामूहिक रूप से दक्कन की सल्तनतें कहा जाता था.

विजयनगर साम्राज्य पर चार राजवंशों ने शासन कार्य किया था- संगम राजवंश, सलुव राजवंश, तुलुव राजवंश और आरविडू राजवंश.

संगम राजवंश

यह विजयनगर साम्राज्य पर शासन करने वाला पहला राजवंश था. इस साम्राज्य के संस्थापकों में हरिहर प्रथम और बुक्का थे.इस वंश नें 1334 ईस्वी से 1485 ईस्वी तक शासन किया.

सुलुव राजवंश

यह राजवंश विजयनगर साम्राज्य पर शासन करने वाला दूसरा वंश था. इसने 1485 ईस्वी से 1505 ईस्वी तक शासन किया. इसने लगभग पूरे दक्षिण भारत पर शासन किया.

तुलुव राजवंश

यह विजयनगर साम्राज्य पर शासन करने वाला तीसरा राजवंश था. विजयनगर साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध राजा कृष्णदेव राय इसी वंश के थे. इस वंश नें 1491 ईस्वी से 1570 ईस्वी तक शासन किया.

आरविडू राजवंश

दक्षिण भारत में विजयनगर राज्य पर शासन करने वाला यह चौथा और अंतिम हिंदू वंश था.