गर्मी में उबलेंगे भारत के ये 5 शहर, Oxford ने El Nino को लेकर जारी की रिपोर्ट

Last Updated: Jun 16, 2026, 15:16 IST

हाल ही में एक नए अध्ययन में भारत के उन 5 शहरों की लिस्ट जारी की गई है, जहां अल-नीनो का अधिक प्रभाव पड़ेगा। इन शहरों में गर्मी का पारा चढ़ने के साथ गर्मी का सितम बढ़ेगा। इस लेख में पूरी रिपोर्ट को पढ़ें। 

अल नीनो का भारत के शहरों पर प्रभाव
अल नीनो का भारत के शहरों पर प्रभाव

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, अल-नीनो आ चुका है। ऐसे में इस बार मानसून में भी सामान्य से कम बारिश होने की संंभावना है। उधर, हाल ही में हुए अध्ययन में उन शहरों की लिस्ट जारी की गई है, जिनमें अन-नीनो का अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा।

इन शहरों में जैसे-जैसे पारा चढ़ेगा, वैसे-वैसे गर्मी का सितम बढ़ेगा। इस कड़ी में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 220 शहरों को लेकर अध्ययन किया है, जिसमें अल-नीनो के खतरे और इससे निपटने की क्षमता का विश्लेषण किया गया है।

दुनिया के किस शहर में पड़ेगा अल-नीनो का अधिक प्रभाव

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में अल-नीनो का सबसे अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान इराक के अल-बसरा में लगाया है। यह शहर सबसे अधिक गर्मी की जद में आ सकता है, जहां आने वाले दिनों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ सकती है।

भारत के इन 5 शहरों में पड़ेगा अल-नीनो का प्रभाव

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में भारत के 5 शहरों का भी विशलेष्ण किया है। इनमें उत्तर प्रदेश का कानपुर, गुजरात का अहमदाबाद, महाराष्ट्र का नागपुर, मध्य प्रदेश का भोपाल और तमिलनाडू का मदुरई शहर शामिल है। इन शहरों में हीट वेव की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। अधिक गर्मी की वजह से हीट वेव चलती हैं, जिससे हीट स्ट्रोक लगने का खतरा बना रहता है। 

शोधकर्ताओं ने माना यह कारण 

शोधकर्ताओं के मुताबिक, दुनिया में अधिक गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर का उपयोग अधिक बढ़ रहा है, जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ावा मिल रहा है। इंसान कुछ समय तक खुद को ठंडा रखने के लिए धरती पर इसके लंबे समय तक का दुष्प्रभाव छोड़ रहा है। ऐसे में मनुष्यों को पैसिव कूलिंग का रूख करना चाहिए, जिसमें समान्य तौर पर खुद को ठंडा रखने के उपाय शामिल हैं। इसके तहत कूलर और पंखे का उपयोग किया जा सकता है। 

क्या होता है El Nino 

अब हम एक बार अल नीनो के बारे में भी समझ लेते हैं। स्पैनिश भाषा में अल नीनो का अर्थ छोटा बच्चा होता है। दरअसल, यह प्रशांत महासागर में होने वाली एक वैश्विक जलवायु घटना है। इसमें भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है।

समुद्र का पानी गर्म होने के कारण मौसमी चक्र में परिवर्तन होता है और इसका असर भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अधिक देखने को मिलता है। दोनों देशों में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे कम बारिश होती है और सूखा अधिक पड़ता है।

वहीं, दूसरी तरफ दक्षिण अमेरिका के शुष्क इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। इस तरह की घटना 2 से 6 साल में एक बार सामान्य तौर पर देखने को मिलती है। हालांकि, यह बड़ी घटना है, जिसका असर कृषि, मनुष्यों, वन्यजीवों और आर्थिक संसाधनों पर पड़ता है। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 16, 2026, 15:16 IST

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